हाथरस 24 अगस्त। दून पब्लिक स्कूल में विद्यालय प्रधानाचार्य जेके अग्रवाल के प्रेरणादाई नेतृत्व में एवं फाउंडेशन कोऑर्डिनेटर नम्रता अग्रवाल, प्राइमरी कॉर्डिनेटर नैतिक राठौड़ व मिडल कॉर्डिनेटर मेदनी कौशिक के सानिध्य में “कृष्ण जन्माष्टमी” एवं “रक्षाबंधन” के पावन पर्व के अवसर पर प्रथम दिवस पर कक्षा नर्सरी से कक्षा द्वितीय तक के नन्हे-मुन्ने बच्चों और द्वितीय दिवस पर कक्षा तीसरी से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए संयुक्त रूप से विशेष सभा का भव्य एवं मनोहारी आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं, आध्यात्मिक मूल्यों तथा भाई-बहन के पवित्र प्रेम से परिचित कराते हुए उनमें संस्कार एवं मानवीय संवेदनाओं का विकास करना रहा। समारोह में नन्हे-मुन्ने राधा कृष्ण स्वरूपों ने कृष्ण जन्माष्टमी एवं रक्षाबंधन की भावनाओं को गीत, नृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अत्यंत आकर्षक ढंग से अभिव्यक्त किया। समारोह में मनोहारी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए प्रधानाचार्य ने छात्रों को विशेष पुरस्कारों से सम्मानित किया, जिसमें कक्षा नर्सरी से कक्षा दूसरी तक में – कनिष्का, इबा, हर्षिका,कियारा, मिष्टी, पार्थ, रिधांशी, पार्थ टांक,और एकादशी रहे। कक्षा तीसरी से कक्षा आठवीं तक में- आलोक अग्रवाल, सुब्रत अग्निहोत्री, निबरुद्ध सिंह,रोशनी ठाकुर, रूही सिंह, अथर्व, वान्या वार्ष्णेय, आराध्या, हर्ष प्रताप सिंह, तृषा रहे। प्रधानाचार्य ने समारोह के अन्य राधा- कृष्ण स्वरूपों को पेंसिल प्रदान कर पुरस्कृत किया।
श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप तथा उनकी लीलाओं से जुड़ी प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वहीं रक्षाबंधन की भावना को दर्शाती प्रस्तुतियों ने प्रेम, विश्वास, सुरक्षा, सम्मान और पारिवारिक संबंधों के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा, रचनात्मकता और आत्मविश्वास का परिचय देते हुए सभी का मनमोह लिया। विद्यालय परिसर में भारतीय संस्कृति एवं परंपरा की सुंदर झलक देखने को मिली।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य जे.के. अग्रवाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “हमारे त्योहार केवल उत्सव मनाने के अवसर नहीं हैं, बल्कि वे हमारी समृद्ध संस्कृति, संस्कारों और जीवन-मूल्यों के जीवंत संदेशवाहक हैं। श्रीकृष्ण का जीवन हमें कर्म, प्रेम, सत्य, कर्तव्य और धैर्य का संदेश देता है, जबकि रक्षाबंधन हमें पारस्परिक प्रेम, विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी का महत्व समझाता है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे इन पर्वों के मूल संदेश को अपने जीवन में आत्मसात करें और एक-दूसरे के प्रति सदैव सहयोग, सम्मान एवं संवेदनशीलता का भाव रखें।” उन्होंने विद्यार्थियों की सुंदर प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि अच्छे संस्कारों और मानवीय मूल्यों से युक्त जिम्मेदार नागरिक बनना भी है। कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी शिक्षकों, समन्वयकों एवं विद्यार्थियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस विशेष सभा ने विद्यालय में उल्लास, सौहार्द, संस्कार एवं भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया। समारोह के समापन पर प्रधानाचार्य द्वारा सभी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी एवं रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।













