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सिकंदराराऊ (हसायन) 27 मई । कोतवाली क्षेत्र के गांव नगला ब्राहमण की रहने वाली एक पीडित महिला ने कोतवाली में तैनात एक उपनिरीक्षक दारोगा स्तर के एक विवेचनाधिकारी पर धन गबन किए जाने के प्रकरण में न्यायालय के आदेश पर हुई रिपोर्ट के प्रकरण में विवेचना किए जाने के दौरान दूसरे पक्ष के विपक्षियों आरोपियो की मदद किए जाने का आरोप लगाते हुए डी.आई.जी. अलीगढ प्रभाकर चौधरी व पुलिस अधीक्षक हाथरस चिरंजीव नाथ सिंन्हा से शिकायत करते हुए विवेचना स्थानातंरित कराए जाने की मांग की है।नगला ब्राह्मण निवासी हीरेश कुमारी ने हसायन कोतवाली में न्यायाल के आदेश पर दर्ज कराए गए मुकदमा संख्या 83/2026 की विवेचना पर सवाल उठाए हैं।उन्होंने डीआईजी अलीगढ व पुलिस अधीक्षक हाथरस को पत्र लिखकर वर्तमान विवेचना अधिकारी की निष्पक्षता पर संदेह व्यक्त करते हुए और जांच को किसी अन्य थाने कोतवाली में स्थानांतरित करने की मांग की है। पीडित महिला हीरेश कुमारी ने आरोप लगाते हुए बताया है कि वर्तमान में कोतवाली में तैनात एक उपनिरीक्षक दारोगा स्तर के विवेचना अधिकारी विपक्षीगण से मिलीभगत कर रहे हैं और जानबूझकर उनके तथा उनके परिजनों के द्वारा विवेचना के लिए उपलब्ध कराए गए महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नजरअंदाज कर रहे हैं।उन्होंने यह भी कहा कि उनका विवेचनाधिकारी के द्वारा अभी तक बयान तक नहीं लिया गया है।जब कि विवेचना अधिकारी उपनिरीक्षक मुकद्दमें में नामजद विपक्षियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।साथ ही उनकी तहरीर के अनुसार मुकद्दमें में धाराएं भी नहीं लगाई गई हैं।शिकायतकर्ता पीडित महिला हीरेश कुमारी ने अपने दावों के समर्थन में कई साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं।इनमें बैंक खाते से निकाले गए रुपयों की दो पेज की विवरण सूची और कार्यवाही पुस्तिका शामिल है,जिस पर हीरेश कुमारी के फर्जी हस्ताक्षर होने का आरोप है।उनका कहना है कि इन फर्जी हस्ताक्षरों को एडीओ आईएसबी हसायन ने गलत होने के बावजूद पास कर दिया था।इसके अतिरिक्त, कुमारी ने खंड विकास अधिकारी का पत्रांक 392/2025 भी प्रस्तुत किया है,जिसमें पैसे निकालने और जमा होने की पुष्टि की गई है तथा बैंक कर्मियों की गलती स्वीकार की गई है।उन्होंने बताया कि आईजीआरएस और पूर्व क्षेत्राधिकारी ने भी पैसे निकालने व जमा होने की बात स्वीकार की है,और चौकी इंचार्ज द्वारा भी अपराध की पुष्टि हो रही है।हीरेश कुमारी ने जोर देकर कहा कि ये सभी तथ्य स्पष्ट रूप से अपराध होने का संकेत देते हैं,फिर भी विवेचना अधिकारी ने हस्ताक्षरों का सत्यापन तक नहीं कराया है और विपक्षियों की मदद कर रहे हैं।उन्होंने डीआईजी से न्यायहित में उनकी विवेचना स्थानांतरित करने और सभी प्रस्तुत साक्ष्यों को जांच में शामिल करने का आग्रह किया है।

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