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मथुरा 11 अगस्त। मौजूदा दौर में बौद्धिक सम्पदा सबसे मूल्यवान सम्पत्ति है क्योंकि यह मानवीय विकास को गति देने वाले तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करती है। यह वैश्विक कला परिदृश्य की उन्नति में भी सहायक है। बौद्धिक सम्पदा काल्पनिक रचनाओं को संदर्भित करती है लिहाजा हमें अपने शोध और आविष्कारों को समय से संरक्षित करना बहुत जरूरी है। यह बातें जी.एल. बजाज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, मथुरा के अनुसंधान एवं विकास परिषद द्वारा इनोवेशन को बढ़ावा देने में इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स की भूमिका विषय पर आयोजित व्याख्यान में मुख्य वक्ता डॉ. अमरीश चंद्रा मैनेजिंग डायरेक्टर लेक्सगिन आईपी ने बताईं। डॉ. अमरीश चंद्रा ने प्राध्यापकों तथा छात्र-छात्राओं को पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क तथा अन्य बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नवाचारों का विधिक संरक्षण अनुसंधान, तकनीकी विकास और आर्थिक प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक है। डॉ. चंद्रा ने छात्र-छात्राओं को अपने शोध एवं आविष्कारों को समय पर संरक्षित कराने के लिए प्रेरित किया।

संस्थान की निदेशक प्रो. (डॉ.) नीता अवस्थी ने संस्थान में अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने हेतु संचालित विभिन्न पहलों पर विस्तार से जानकारी दी तथा कहा कि बौद्धिक सम्पदा अधिकारों की समझ विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप शोध एवं नवाचार करने को प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि इस व्याख्यान का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के महत्व से अवगत कराना तथा अनुसंधान, नवाचार एवं रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना है। विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) वी.के. सिंह ने इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स पर कहा कि यह विद्यार्थियों को उनकी रचनात्मक एवं शोधपरक उपलब्धियों को उचित कानूनी संरक्षण प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगी। प्रो. सिंह ने कहा कि बौद्धिक सम्पदा अधिकार (आईपीआर) इसलिए जरूरी हैं क्योंकि ये रचनाकारों और आविष्कारकों को उनके विचारों, कला और नई तकनीकों की चोरी या अवैध उपयोग से कानूनी सुरक्षा प्रदान करते हैं। यह सुरक्षा नवाचार को बढ़ावा देने के साथ सही पहचान सुनिश्चित करती है तथा रचनाकारों को उनकी मेहनत का आर्थिक लाभ दिलाती है। कार्यक्रम के समन्वय डॉ. वजीर सिंह, सहायक प्राध्यापक, एप्लाइड साइंस एंड ह्यूमैनिटीज विभाग ने छात्र-छात्राओं को अपने शोध एवं रचनात्मक कार्यों को बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के माध्यम से सुरक्षित-संरक्षित करने तथा नवाचार की संस्कृति को अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता की। अंत में डॉ. अभिषेक सिंह, समन्वयक, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ ने सभी का आभार माना।

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