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हाथरस 18 जुलाई। नवजात शिशुओं को दूध पिलाने के बाद डकार न दिलाना उनकी जान के लिए खतरा बन सकता है। जिले में बीते छह माह के दौरान दूध श्वास नली में फंसने से पांच नवजातों की मौत हो चुकी है। जिला अस्पताल में भी हर महीने ऐसे एक-दो मामले सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से नवजात की देखभाल में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार नवजात शिशुओं की भोजन नली और श्वास नली एक-दूसरे के बेहद करीब होती हैं तथा उनके गले की मांसपेशियां पूरी तरह विकसित नहीं होतीं। यदि बच्चे को लेटकर दूध पिलाया जाए या दूध पिलाने के तुरंत बाद पीठ के बल सुला दिया जाए तो दूध वापस ऊपर आकर श्वास नली में जा सकता है। इससे बच्चे का दम घुट सकता है और कई बार स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि बच्चा रो भी नहीं पाता। चिकित्सकों का कहना है कि चाहे बच्चे को मां का दूध पिलाया जा रहा हो या पाउडर वाला दूध, हर बार दूध पिलाने के बाद उसे कम से कम 10 से 20 मिनट तक कंधे से लगाकर हल्की थपकी देकर डकार दिलाना आवश्यक है। डकार आने के बाद ही बच्चे को सुलाना चाहिए और सुलाते समय सिर का हिस्सा थोड़ा ऊंचा रखना बेहतर होता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वेदप्रकाश अग्रवाल ने बताया कि हाल के महीनों में इस तरह की घटनाओं में वृद्धि हुई है, जबकि उचित जानकारी और सावधानी से इन्हें रोका जा सकता है। उन्होंने आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर परिवारों को जागरूक करने के निर्देश दिए हैं, ताकि विशेष रूप से छह से सात माह तक के बच्चों की देखभाल के सही तरीकों की जानकारी प्रत्येक परिवार तक पहुंच सके। स्वास्थ्य विभाग ने पाउडर वाले दूध का उपयोग करने वाले अभिभावकों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। दूध बनाने से पहले हाथ अच्छी तरह धोएं, उबले हुए गुनगुने पानी का ही उपयोग करें, डिब्बे पर दिए गए अनुपात के अनुसार पहले पानी और फिर पाउडर मिलाएं, दूध का तापमान जांचने के बाद ही बच्चे को पिलाएं तथा बचा हुआ दूध दोबारा प्रयोग न करें। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश हादसे रात या तड़के के समय होते हैं, जब थकान के कारण अभिभावक बच्चे को बिना डकार दिलाए ही सुला देते हैं। इसलिए रात के समय अतिरिक्त सतर्कता बरतना और हर बार दूध पिलाने के बाद डकार अवश्य दिलाना नवजात की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

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