मथुरा 22 अगस्त। संस्कृति विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर की ओर से “पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बागवानी विकास केंद्र के रूप में स्थापित करना” विषय पर एक दिवसीय महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में किसानों की आय बढ़ाने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विस्तार से मंथन किया गया। कार्यशाला के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के प्रबंध निदेशक कपिल मीणा ने किसानों को पारंपरिक गेहूं-धान की खेती से आगे बढ़कर बाजार की मांग एवं स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप उच्च मूल्य वाली फल, सब्जी, फूल सहित अन्य बागवानी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कपिल मीणा ने बागवानी क्षेत्र में रोजगार सृजन, मूल्य संवर्धन, उद्यमिता और सतत कृषि विकास की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों, कुशल सिंचाई व्यवस्था, संरक्षित खेती, फसल कटाई के बाद बेहतर प्रबंधन तथा बाजार से मजबूत संपर्क स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को कृषि, बागवानी, उद्यमिता, अनुसंधान एवं सरकारी सेवाओं में उपलब्ध रोजगार और करियर के अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
मुख्य अतिथि ने अपने बीएससी कृषि से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) तक के प्रेरणादायक सफर को भी विद्यार्थियों के साथ साझा किया। उन्होंने छात्रों से लगन, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने का आह्वान किया। संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एम. बी. चेट्टी ने मुख्य अतिथि कपिल मीणा एवं विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के उप प्रबंध निदेशक डॉ. विजय कुमार दोहरे का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने तथा किसानों एवं युवा पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा करने में बागवानी की महत्वपूर्ण भूमिका है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के उप प्रबंध निदेशक डॉ. विजय कुमार दोहरे ने देश में बागवानी विकास को बढ़ावा देने में एनएचबी की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों, उद्यमियों एवं अन्य हितधारकों के लिए उपलब्ध विभिन्न सरकारी योजनाओं, वित्तीय सहायता एवं सहयोग तंत्र की जानकारी दी। उन्होंने कोल्ड चेन, पैक हाउस, भंडारण, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन जैसी सुविधाओं को बागवानी क्षेत्र की सफलता के लिए महत्वपूर्ण बताया।
डॉ. दोहरे ने विद्यार्थियों को बागवानी को नवाचार, उद्यमिता और व्यावसायिक विकास के महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में देखने के लिए प्रेरित किया। दोनों वक्ताओं के संबोधन से प्रतिभागियों को पश्चिमी उत्तर प्रदेश को प्रमुख बागवानी विकास केंद्र के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं और अवसरों की महत्वपूर्ण जानकारी मिली। कार्यशाला में वक्ताओं ने संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. सचिन गुप्ता के निरंतर मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही विश्वविद्यालय में शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान, नवाचार और मजबूत उद्यमशीलता पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने में उनके योगदान की सराहना की गई। कार्यक्रम का समापन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर के डीन डॉ. कंचन कुमार सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के अधिकारियों, कुलपति, विभिन्न विभागों के डीन, संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों की गरिमामयी उपस्थिति और योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।













