Spor karşılaşmalarına hızlı bahis yapmak için bahsegel kategorisi seçiliyor.

साहित्य
1 min read
780

कु० राखी सिंह शब्दिता की गजल

July 3, 2018
0

ग़ज़ल तुमको भी मुहब्बत है बता क्यूं नहीं देते । रस्मों को वफ़ाओं की निभा क्यूं नहीं देते ।। हंसकर के मुझे देते हैं वो दर्दे- जुदाई ; ज़ख्मों की मगर मुझको दवा क्यूं नहीं देते ।। आँखों में कहीं दर्द समन्दर सा है गहरा ; जी भर के मुझे

Continue Reading
साहित्य
1 min read
883

शिव कुमार ‘दीपक’ की कुंडलियां

June 30, 2018
0

पानी की महिमा बड़ी , पानी जग का सार । समझो वह बेकार है , जो ना पानीदार ।। जो ना पानीदार ,नदी,नल,सर, तरु,जलधर । करें नही सम्मान ,नाव ,नर ,शकुची ,नभचर। कहता ‘दीपक’ सत्य , बताते सुर ,नर ज्ञानी । पंच तत्व में एक ,मुख्य जीवन हित पानी ।-१

Continue Reading
साहित्य
1 min read
992

‘आह का अनुवाद’ गीतकार – इन्द्रपाल सिंह “इन्द्र”

June 30, 2018
0

——आह का अनुवाद—– अश्रु की गंगा नयन से पीर ने जब-जब उतारी, याद आती है तुम्हारी….याद आती है तुम्हारी…. मौन साधा है अधर ने पूर्ण है पर बात सारी, याद आती है तुम्हारी ….याद आती है तुम्हारी…. प्यार का संसार था वो कल्प मुझको याद है, सुर्ख अधरों की छुअन

Continue Reading
साहित्य
1 min read
991

मंदसौर घटना पर एक ज्वलन्त कविता अवशेष मानवतावादी द्वारा

June 30, 2018
0

मंदसौर घटना पर एक ज्वलन्त कविता …………………………………………… मंदसौर की घटना ने फिर से जनमानस हिला दिया। तार तार मानवता कर दी दानवता को खिला दिया।। आग क्रोध की लगी जहन में पीड़ा से है त्रस्त कलम। बोलो घायल मानवता पर कौन लगाएगा मरहम।। छोटी सी मासूम परी पर दुष्ट दरिंदे

Continue Reading
साहित्य
1 min read
823

यशोधरा यादव ‘यशो’ का नव गीत “सम्बोधनों के मौन”

June 28, 2018
1

हो गये हैं शब्द क्यों सम्बोधनों के मौन . खींचता नैराश्य जग में जिन्दगी को कौन. खिलखिलाहट हो गई गुजरे समय की बात , अब नहीं होती रसिक मनु हार की बरसात, भूल कर उद्बोधनों को अधर बैठे मौन. व्यर्थ की आसक्ति मन में भय का ताण्डव है रंजिशों के

Continue Reading
साहित्य
1 min read
770

संजीव गौतम की ग़ज़लें

June 28, 2018
0

एक दरोगा है वो दुनिया का दरोगाई दिखाता है। जिसे चाहे बनाता है, जिसे चाहे मिटाता है। अमन के दुश्मनों को रात में वो देके बंदूके, सुबह से फिर वयम रक्षाम का नारा लगाता है। सियासत का खिलाड़ी है बड़ी चतुराई से देखो, रियासत को लुटाकर वोट की फसलें उगाता

Continue Reading
साहित्य
1 min read
761

अकबर सिंह अकेला की कविता पानी – पानी

June 28, 2018
0

पानी पानी नहिं रहा, पानी बना विशेष | मात भारती कौ भुवहिं, रूप कुरूपहिं भेष ||1|| तापमान की बेरुखी, इसकी कुत्सित चाल | जन मानस का हो रहा, हाल यहाँ बेहाल ||2|| पेड़ काटि हमने दिए, किनको दैहैं दोष | नदियाँ नाले सूखिहै, दुर बरखाई कोष ||3|| फट- फट मोटर

Continue Reading
साहित्य
1 min read
1213

माँ पर शिव कुमार ‘दीपक’ के मार्मिक दोहे

June 27, 2018
0

जननी करती उम्र भर , जीवन पथ आलोक । माँ के आगे क्षुद्र हैं , धरा, गगन , सुरलोक ।।-1 घाट-घाट का जल पिया, बुझी न मन की प्यास । माँ के चरणों में हुआ , जन्नत का आभास ।।-2 हे मेरे भगवान जी , ऐसा दो आशीष । सारी

Continue Reading
साहित्य
1 min read
659

शिव कुमार “दीपक” के गीत

June 27, 2018
0

गीत- छलक आँख से आँसू आये छलक आँख से आँसू आये । मन की लागी कौन बुझाये ।। सूरज का रथ जब आता है । तन मन में आग लगता है ।। घर सांझ हमारे आती है । एकाकी पन दे जाती है ।। नीड़ बनाते बीते रजनी , महा

Continue Reading
साहित्य
1 min read
576

अवनीश यादव के दस दोहे

June 12, 2018
0

जो करते माँ बाप का, निज कर से अपमान। कभी न होगा जगत में, उनका तो यशगान।। जब जब माँ ने गोद में, लेकर किया दुलार। जन्नत जैसा सुख मिला, अद्भुत माँ का प्यार।। जब जब भी झुककर छुए, मैंने माँ के पाँव। तब तब मुझको मिल गयी, आशीषों की

Continue Reading