शिशु के लिए मां का दूध अमृत समान : डॉ. आरके अशोका, केडी हॉस्पिटल में विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत हो रहे विविध कार्यक्रम
मथुरा 02 अगस्त । शिशु के लिए मां का दूध एक सम्पूर्ण आहार होता है। इसमें सभी जरूरी पोषक तत्व, विटामिन और मिनरल सही मात्रा में मौजूद होते हैं। मां का दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, जिससे वह संक्रमण तथा अन्य बीमारियों से सुरक्षित रहता है। मां
लखनऊ से हैदराबाद जाने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट रनवे पर ही निरस्त, 120 यात्री हुए परेशान, तकनीकी खामी के चलते लखनऊ से दिल्ली और अजमेर की उड़ानें भी रद्द
लखनऊ 01 अगस्त । आज लखनऊ एयरपोर्ट से हैदराबाद जाने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान संख्या IX-2816 को उड़ान भरने से पहले ही अचानक निरस्त कर दिया गया। उड़ान रद्द करने का कारण तकनीकी गड़बड़ी बताया गया है। विमान में 120 यात्री सवार थे, जो इस अचानक निर्णय से
हाथरस जनपद के महत्वपूर्व मोबाइल नंबर
जन प्रतिनिधियों के नंबर नाम पता नंबर राजेश दिवाकर 9013866419 हरिशंकर माहौर 9412276451 वीरेंद्र सिंह राना श्रीमती ओमवती बुआ 8954190270 जसवंत सिंह 9811475946 आशीष शर्मा 9837084440 श्रीमती गुड्डी बुआ 9897474915 राधेश्याम रजक 9456277268 श्रीमती रामवती माहौर 9690339428 श्रीमती सुषमा देवी 8630934465 नारायण लाल 8057820681 विनोद कुमार कर्दम 9219879945 निशांत उपाध्याय
हाथरस से जाने वाली बसों का टाइम टेबल
हाथरस से जाने वाली बसों का टाइम टेबल कहाँ से – कहाँ तक वाया टाइम हाथरस से नोएडा यमुना एक्सप्रेससवे 5:30, 6:00, 6:30, 7:00 हाथरस से नोएडा यमुना एक्सप्रेससवे 12:30, 13:00, 16:00 हाथरस से दिल्ली अलीगढ, खुर्जा 4:30, 5:00. 5:30, 6:00. 8:00 बल्लभगढ़ इगलास, गौड़ा 6:00, 6:30
सुरजीत मान जलईया सिंह की नई रचना ” प्रधान ”
पीठ पीछे जानता है क्या क्या कहते लोग हैं? सामने आता नहीं है कोई भी रघुराज के। जीतकर आया प्रधानी रोब थानेदार का। रोज दुगना बढ़ रहा है कद भी अब किरदार का। छटपटाती है खजूरी बोलती कुछ भी नहीं जैसे पंजों में फंसी हो एक चिड़िया बाज़ के। सामने
अवशेष मानवतावादी का गीत – फिर भी ईश्वर के होने का होता है अहसास
ना तो कोई भी सबूत है ना गवाह है पास। फिर ईश्वर भी के होने का होता है अहसास।। तोड़ तोड़कर कण को हमने कण कण में तोड़ा। फिर कण के टूटे कण कण को आपस में जोड़ा।। तत्व तत्व में छिपे तत्व का सारा तत्व निकाला, धरती क्या अम्बर
शिव कुमार ‘दीपक’ की बाल रचना
झूला लेकर आया सावन । हरियाली ले वर्षा आयी । बच्चों ने ली मन अंगड़ाई ।। दादुर पपिहा नाचे मोर । काली कोयल करे कनकोर ।। धानी चूँदर ओढ़े धरती । रिमझिम रिमझिम बरसा बरसी । छुक – छुक बच्चे रेल चलाते । हँसते गाते खूब नहाते ।। नदिया पोखर
अकबर सिंह अकेला की एक कविता –
वर्षा झमझम हो रही, मौसम भी परवान। हवा निराली चल रही, पंछी गाउत गान।। दिन में अँधियारी झुकी, बिल्कुल रात समान। लुका छिपी बदरा करें, सूरज अंतर ध्यान।। सांय काल में लग रहा, कबहुं न बरसो नीर | धूप खिली राहत मिली, बदलो रुखहिं समीर || अकबर सिंह अकेला मानिकपुर,
यशोधरा यादव ‘यशो’का एक नवगीत
लेखनी कुछ गीत लिख दुःखित जन को प्रीति लिख . कामनाओं की लता जब पुष्प से सज्जित हुई यंत्रवत कर्मों से हटकर प्रीति प्रतिबिम्बत हुई छंद के स्वर्णिम सवेरों की नयी रणनीति लिख लेखनी………… सूखते संबंध की टहनी पर कलियां खिल उठें बैठे जो अनजान बन मन मीत बन मिल
कु० राखी सिंह शब्दिता की गजल
ग़ज़ल तुमको भी मुहब्बत है बता क्यूं नहीं देते । रस्मों को वफ़ाओं की निभा क्यूं नहीं देते ।। हंसकर के मुझे देते हैं वो दर्दे- जुदाई ; ज़ख्मों की मगर मुझको दवा क्यूं नहीं देते ।। आँखों में कहीं दर्द समन्दर सा है गहरा ; जी भर के मुझे






















