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‘आह का अनुवाद’ गीतकार – इन्द्रपाल सिंह “इन्द्र”

June 30, 2018
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——आह का अनुवाद—– अश्रु की गंगा नयन से पीर ने जब-जब उतारी, याद आती है तुम्हारी….याद आती है तुम्हारी…. मौन साधा है अधर ने पूर्ण है पर बात सारी, याद आती है तुम्हारी ….याद आती है तुम्हारी…. प्यार का संसार था वो कल्प मुझको याद है, सुर्ख अधरों की छुअन

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मंदसौर घटना पर एक ज्वलन्त कविता अवशेष मानवतावादी द्वारा

June 30, 2018
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मंदसौर घटना पर एक ज्वलन्त कविता …………………………………………… मंदसौर की घटना ने फिर से जनमानस हिला दिया। तार तार मानवता कर दी दानवता को खिला दिया।। आग क्रोध की लगी जहन में पीड़ा से है त्रस्त कलम। बोलो घायल मानवता पर कौन लगाएगा मरहम।। छोटी सी मासूम परी पर दुष्ट दरिंदे

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यशोधरा यादव ‘यशो’ का नव गीत “सम्बोधनों के मौन”

June 28, 2018
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हो गये हैं शब्द क्यों सम्बोधनों के मौन . खींचता नैराश्य जग में जिन्दगी को कौन. खिलखिलाहट हो गई गुजरे समय की बात , अब नहीं होती रसिक मनु हार की बरसात, भूल कर उद्बोधनों को अधर बैठे मौन. व्यर्थ की आसक्ति मन में भय का ताण्डव है रंजिशों के

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संजीव गौतम की ग़ज़लें

June 28, 2018
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एक दरोगा है वो दुनिया का दरोगाई दिखाता है। जिसे चाहे बनाता है, जिसे चाहे मिटाता है। अमन के दुश्मनों को रात में वो देके बंदूके, सुबह से फिर वयम रक्षाम का नारा लगाता है। सियासत का खिलाड़ी है बड़ी चतुराई से देखो, रियासत को लुटाकर वोट की फसलें उगाता

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अकबर सिंह अकेला की कविता पानी – पानी

June 28, 2018
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पानी पानी नहिं रहा, पानी बना विशेष | मात भारती कौ भुवहिं, रूप कुरूपहिं भेष ||1|| तापमान की बेरुखी, इसकी कुत्सित चाल | जन मानस का हो रहा, हाल यहाँ बेहाल ||2|| पेड़ काटि हमने दिए, किनको दैहैं दोष | नदियाँ नाले सूखिहै, दुर बरखाई कोष ||3|| फट- फट मोटर

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माँ पर शिव कुमार ‘दीपक’ के मार्मिक दोहे

June 27, 2018
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जननी करती उम्र भर , जीवन पथ आलोक । माँ के आगे क्षुद्र हैं , धरा, गगन , सुरलोक ।।-1 घाट-घाट का जल पिया, बुझी न मन की प्यास । माँ के चरणों में हुआ , जन्नत का आभास ।।-2 हे मेरे भगवान जी , ऐसा दो आशीष । सारी

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शिव कुमार “दीपक” के गीत

June 27, 2018
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गीत- छलक आँख से आँसू आये छलक आँख से आँसू आये । मन की लागी कौन बुझाये ।। सूरज का रथ जब आता है । तन मन में आग लगता है ।। घर सांझ हमारे आती है । एकाकी पन दे जाती है ।। नीड़ बनाते बीते रजनी , महा

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अवनीश यादव के दस दोहे

June 12, 2018
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जो करते माँ बाप का, निज कर से अपमान। कभी न होगा जगत में, उनका तो यशगान।। जब जब माँ ने गोद में, लेकर किया दुलार। जन्नत जैसा सुख मिला, अद्भुत माँ का प्यार।। जब जब भी झुककर छुए, मैंने माँ के पाँव। तब तब मुझको मिल गयी, आशीषों की

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कु० राखी सिंह शब्दिता द्वारा रचित सरस्वती वंदना

June 3, 2018
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शारदे माँ शारदे तू , ज्ञान हम पर वार दे । दूर कर अज्ञान का तम, अब जहां को तार दे ।। वंदना से आरती हो, लेखनी ही थाल हो । धूप दीपक काव्य का हो, छंद की जयमाल हो ।। गीत सब हो जायें अक्षत, ऐसी वीणा तान दो

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होली पर शिव कुमार ‘दीपक’ की कलम ✍ से कुछ खास-

March 1, 2018
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होली के रंग, दीपक के संग रंग पर्व अब देश में, लाये नई बहार । जले होलिका द्वेष की, मन में पनपे प्यार ।। रीत प्रेम सद भाव की,अदभुत एक मिसाल । प्रेम विरोधी से मिला, लेकर रंग गुलाल ।। प्रेम -रीत सद भाव का, होली का त्यौहार । आओ

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