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हाथरस में चुनाव प्रचार के अंतिम दिन दिखा भाजपा का दम, सांसद ने संभाली गाड़ी की कमान; एक ही कार में नजर आए दिग्गज नेता, एक साथ निकले जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी
हाथरस 21 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की शिक्षक एवं स्नातक सीटों के चुनाव प्रचार के अंतिम दिन हाथरस में भाजपा का चुनावी अभियान पूरे जोर-शोर से नजर आया। इस दौरान एक ऐसा दिलचस्प नजारा देखने को मिला, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। हाथरस के सांसद
दून स्कूल में सीबीएसई की पहल पर सीटी एवं एआई पर ‘केस पेपर प्रेजेंटेशन’ कार्यशाला का आयोजन
हाथरस 25 अगस्त। दून पब्लिक स्कूल में विद्यालय प्रधानाचार्य जे० के० अग्रवाल, सीबीएसई डिस्ट्रिक्ट, ट्रेनिंग कोऑर्डिनेटर के कुशल दिशा-निर्देशन में सीबीएसई के सी०ओ०ई० नोएडा की पहल पर कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (CT) एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विषय पर आधारित कार्यशाला के अगले चरण ‘केस पेपर प्रेजेंटेशन’ का प्रभावशाली आयोजन किया गया। यह
हाथरस से जाने वाली बसों का टाइम टेबल
हाथरस से जाने वाली बसों का टाइम टेबल कहाँ से – कहाँ तक वाया टाइम हाथरस से नोएडा यमुना एक्सप्रेससवे 5:30, 6:00, 6:30, 7:00 हाथरस से नोएडा यमुना एक्सप्रेससवे 12:30, 13:00, 16:00 हाथरस से दिल्ली अलीगढ, खुर्जा 4:30, 5:00. 5:30, 6:00. 8:00 बल्लभगढ़ इगलास, गौड़ा 6:00, 6:30
सुरजीत मान जलईया सिंह की नई रचना ” प्रधान ”
पीठ पीछे जानता है क्या क्या कहते लोग हैं? सामने आता नहीं है कोई भी रघुराज के। जीतकर आया प्रधानी रोब थानेदार का। रोज दुगना बढ़ रहा है कद भी अब किरदार का। छटपटाती है खजूरी बोलती कुछ भी नहीं जैसे पंजों में फंसी हो एक चिड़िया बाज़ के। सामने
अवशेष मानवतावादी का गीत – फिर भी ईश्वर के होने का होता है अहसास
ना तो कोई भी सबूत है ना गवाह है पास। फिर ईश्वर भी के होने का होता है अहसास।। तोड़ तोड़कर कण को हमने कण कण में तोड़ा। फिर कण के टूटे कण कण को आपस में जोड़ा।। तत्व तत्व में छिपे तत्व का सारा तत्व निकाला, धरती क्या अम्बर
शिव कुमार ‘दीपक’ की बाल रचना
झूला लेकर आया सावन । हरियाली ले वर्षा आयी । बच्चों ने ली मन अंगड़ाई ।। दादुर पपिहा नाचे मोर । काली कोयल करे कनकोर ।। धानी चूँदर ओढ़े धरती । रिमझिम रिमझिम बरसा बरसी । छुक – छुक बच्चे रेल चलाते । हँसते गाते खूब नहाते ।। नदिया पोखर
अकबर सिंह अकेला की एक कविता –
वर्षा झमझम हो रही, मौसम भी परवान। हवा निराली चल रही, पंछी गाउत गान।। दिन में अँधियारी झुकी, बिल्कुल रात समान। लुका छिपी बदरा करें, सूरज अंतर ध्यान।। सांय काल में लग रहा, कबहुं न बरसो नीर | धूप खिली राहत मिली, बदलो रुखहिं समीर || अकबर सिंह अकेला मानिकपुर,
यशोधरा यादव ‘यशो’का एक नवगीत
लेखनी कुछ गीत लिख दुःखित जन को प्रीति लिख . कामनाओं की लता जब पुष्प से सज्जित हुई यंत्रवत कर्मों से हटकर प्रीति प्रतिबिम्बत हुई छंद के स्वर्णिम सवेरों की नयी रणनीति लिख लेखनी………… सूखते संबंध की टहनी पर कलियां खिल उठें बैठे जो अनजान बन मन मीत बन मिल
कु० राखी सिंह शब्दिता की गजल
ग़ज़ल तुमको भी मुहब्बत है बता क्यूं नहीं देते । रस्मों को वफ़ाओं की निभा क्यूं नहीं देते ।। हंसकर के मुझे देते हैं वो दर्दे- जुदाई ; ज़ख्मों की मगर मुझको दवा क्यूं नहीं देते ।। आँखों में कहीं दर्द समन्दर सा है गहरा ; जी भर के मुझे
शिव कुमार ‘दीपक’ की कुंडलियां
पानी की महिमा बड़ी , पानी जग का सार । समझो वह बेकार है , जो ना पानीदार ।। जो ना पानीदार ,नदी,नल,सर, तरु,जलधर । करें नही सम्मान ,नाव ,नर ,शकुची ,नभचर। कहता ‘दीपक’ सत्य , बताते सुर ,नर ज्ञानी । पंच तत्व में एक ,मुख्य जीवन हित पानी ।-१








