
हाथरस 05 सितम्बर। भारत को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के वृहद लक्ष्य के तहत कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), हाथरस द्वारा अरहर की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अरहर के लगातार घटते रकबे को देखते हुए केवीके की ओर से चयनित किसानों के खेतों पर अरहर उत्पादन के परीक्षण किए जा रहे हैं। यह कार्यक्रम आईसीएआर-अटारी, कानपुर जोन-3 तथा केवीके प्रभारी डॉ. एसआर सिंह के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए डॉ. बलवीर सिंह ने अमृतपाल के साथ गांव-गांव पहुंचकर किसानों के खेतों का भ्रमण शुरू किया है। इस दौरान उनके द्वारा अरहर की फसल के परीक्षण का सघन मूल्यांकन करने के साथ किसानों को फसल प्रबंधन और वैज्ञानिक खेती की तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। डॉ. बलवीर सिंह किसानों से सीधे संवाद करते हुए उन्हें अरहर की उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका कहना है कि वैज्ञानिक तकनीकों का उचित प्रयोग कर अरहर का उत्पादन और खेती का रकबा दोनों बढ़ाए जा सकते हैं, जिससे किसानों की आय में भी वृद्धि की संभावनाएं बढ़ेंगी। डॉ. बलवीर सिंह के गांव-गांव जाकर किसानों से सीधे जुड़ने और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी साझा करने से किसानों में अरहर की खेती को लेकर उत्साह बढ़ रहा है और फसल के प्रति नया रुझान देखने को मिल रहा है। दलहन उत्पादन बढ़ाने और किसानों को उन्नत तकनीक से जोड़ने की दिशा में ऐसे खेत-स्तरीय प्रदर्शन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद भी दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से उन्नत तकनीकों के प्रसार और प्रदर्शन आधारित तकनीक हस्तांतरण पर जोर दे रही है।









