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सिकन्दराराऊ 02 जुलाई। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निबंधन विभाग के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं एवं टाइपिस्टों का संयुक्त आंदोलन गुरुवार को लगातार 23वें दिन भी जारी रहा। उप-पंजीयक कार्यालय परिसर में आयोजित धरना-प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने एक स्वर में कहा कि जब तक सरकार निजीकरण का प्रस्ताव पूरी तरह वापस नहीं लेती, तब तक उनका लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा। धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता डी.के. चौहान ‘शोला’ एडवोकेट ने की, जबकि संचालन देवकांत कौशिक (पूर्व सचिव) एडवोकेट ने किया। इस अवसर पर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डी.के. चौहान ‘शोला’ ने कहा कि यह संघर्ष केवल अधिवक्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनता के अधिकारों, पारदर्शी व्यवस्था और हजारों लोगों के रोजगार की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सरकार से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए निबंधन विभाग के निजीकरण का प्रस्ताव तत्काल वापस लेने की मांग की। आंदोलन को विभिन्न संगठनों और अधिवक्ताओं का लगातार समर्थन मिल रहा है। धरने में सचिव राजेश बघेल, युवराज सिंह चौहान, गौरी शंकर गुप्ता, नरेश प्रताप, महेंद्र सिंह यादव, मुरारी लाल शर्मा, हुकम सिंह बघेल, ब्रजेश यादव, महेश चंद्र अंजाना, जितेंद्र कुमार, सूरजपाल बघेल, रमेश शर्मा, के.एम. कुलश्रेष्ठ, ब्रजेश पाठक, अरविंद कुमार शर्मा, विपिन कुमार, श्रीकृष्ण, सत्यप्रकाश गोला, सुखवीर सिंह यादव, मुनीश शर्मा, रंजीत पौरुष, समीर यादव, विजय उपाध्याय, दिनेश माहौर, रूपेंद्र कुमार बघेल, प्रियांशु दरगढ़, दीपेश पाठक, कोमल सिंह, अजीत चौहान, आनंद कुमार, देवेंद्र कुमार संत, संजीव कुमार यादव, धनीराम, राजकुमार एवं सुशील सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, कातिब, स्टाम्प विक्रेता और टाइपिस्ट मौजूद रहे। धरना स्थल पर आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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