Hamara Hathras

Latest News

अलीगढ़ 30 सितम्बर। मंगलायतन विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट एंड कॉमर्स के एमबीए विद्यार्थियों के लिए सामाजिक विज्ञान और समाज में स्मृति ग्रंथों की प्रासंगिकता विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, सामाजिक मूल्यों तथा प्राचीन स्मृति साहित्य की आधुनिक समाज और प्रबंधन के संदर्भ में उपयोगिता से परिचित कराना था। मुख्य वक्ता प्रो. उमेश होलानी ने बताया कि स्मृति ग्रंथ भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनमें सामाजिक व्यवस्था, कर्तव्य, नैतिकता, आचार-विचार, न्याय, पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्वों से संबंधित विचार मिलते हैं। विद्यार्थियों को यह समझाया गया कि इन ग्रंथों का अध्ययन केवल ऐतिहासिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक विज्ञान, नेतृत्व, नैतिक निर्णय, संगठनात्मक व्यवहार और सामाजिक उत्तरदायित्व के संदर्भ में भी किया जा सकता है। व्याख्यान में विशेष रूप से प्रबंधन में नैतिकता, नेतृत्व के सिद्धांत, निर्णय लेने की प्रक्रिया, सामाजिक उत्तरदायित्व, मानवीय मूल्यों और संगठन में व्यवहार जैसे विषयों से स्मृति साहित्य के संभावित संबंधों पर चर्चा की गई। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि प्राचीन भारतीय विचारों को आधुनिक प्रबंधन सिद्धांतों के साथ जोड़ते समय उनके ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भ को समझना आवश्यक है। व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने विषय से संबंधित प्रश्न पूछे और सक्रिय सहभागिता की। आयोजन में डीन एफएमसी प्रो. राजीव शर्मा, विभागाध्यक्ष प्रो. अनुराग शाक्या का सहयोग रहा। समन्वयक डा. नियति शर्मा, डा. उन्नति जादौन, डा. तहा नकवी द्वारा किया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts

You cannot copy content of this page