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अलीगढ़ 30 सितम्बर। कला केवल रंगों और आकृतियों का मेल नहीं, बल्कि आत्मा की वह अभिव्यक्ति है जो साधारण को भी असाधारण बना देती है। मंगलायतन विश्वविद्यालय के विजुअल एंड परफॉर्मिंग आर्ट विभाग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय रेजिन आर्ट कार्यशाला का बुधवार को भावपूर्ण समापन हुआ। समारोह की शुरुआत ज्ञान और कला की अधिष्ठात्री मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। पांच दिनों तक चले इस कलात्मक आयोजन में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता, लगन और कला के प्रति समर्पण का बेजोड़ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई रेजिन आर्ट की अद्भुत डिजाइनों और कलाकृतियों को देखकर उपस्थित अतिथि व कलाप्रेमी अभिभूत हो गए।

मुख्य अतिथि प्रख्यात कलाविद डा. चित्रलेखा सिंह ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि कला का सफर अनादि काल से चला आ रहा है। उन्होंने प्राचीन कला से लेकर आधुनिक रेजिन आर्ट तक के सफर को भारतीय परंपराओं व सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ते हुए बड़े ही मार्मिक और हृदयस्पर्शी ढंग से रेखांकित किया। कुलपति प्रो. पीके दशोरा ने कहा कि कला का क्षेत्र असीम और व्यापक है। जीवन का ऐसा कोई कोना नहीं जहां कला की उपस्थिति न हो। कला केवल देखने या लिखने तक सीमित नहीं है, यह विचारों के संप्रेषण और आनंद की पराकाष्ठा है। विद्यार्थियों को अपने समय के एक-एक क्षण का सही उपयोग करना चाहिए और सामने आए हर अवसर को सहर्ष स्वीकार कर जीवन में हमेशा सर्वश्रेष्ठ करने की ओर कदम बढ़ाना चाहिए। कुलसचिव कमांडर मनोज के. ने कहा कि कला विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और उनमें रचनात्मक सोच जगाने का एक सशक्त माध्यम है। इस प्रकार के व्यावहारिक व हुनर आधारित आयोजनों से छात्रों की प्रतिभा निखरती है। कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। विभागाध्यक्ष प्रो. देवाशीष चक्रवर्ती ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस कलात्मक यात्रा में डा. पूनम रानी, अजय सिंह राठौर, विलास पालके, उदय सिंह कुशवाह सहित विद्यार्थियों का सहयोग रहा। संचालन याशिका गुप्ता ने किया।

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