मथुरा 17 सितम्बर। सृजन, कौशल और निर्माण के प्रतीक भगवान विश्वकर्मा की जयंती जीएल बजाज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, मथुरा में गुरुवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। वैदिक एवं पौराणिक मंत्रोच्चार के बीच हवन हुआ और पवित्र अग्नि में आहुतियां अर्पित कर भगवान विश्वकर्मा का विधिवत पूजन किया गया। इस अवसर पर संस्थान मंु स्थापित मशीनों तथा इंजीनियरिंग में इस्तेमाल होने वाले औजारों की भी पूजा की गई। संस्थान की निदेशक डॉ. नीता अवस्थी ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा सृजन, कौशल और उत्कृष्टता के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह भगवान विश्वकर्मा ने अपने अद्वितीय कौशल से सृष्टि को सुंदर और उपयोगी स्वरूप प्रदान किया, उसी तरह विद्यार्थी अपने ज्ञान, कौशल और प्रतिभा से देश और समाज को नई दिशा दे सकते हैं। डॉ. नीता अवस्थी ने छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि भगवान विश्वकर्मा सृजन और निर्माण के अद्वितीय प्रतीक हैं।
डॉ. अवस्थी ने छात्र-छात्राओं से कहा कि वे अपने ज्ञान और तकनीकी दक्षता का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि देश और समाज के निर्माण में भी करें। उन्होंने कहा कि कुशल युवा ही विकसित और सक्षम भारत की मजबूत नींव तैयार कर सकते हैं। डॉ. अवस्थी ने कहा कि जिस प्रकार भगवान विश्वकर्मा ने अपनी प्रतिभा और कौशल से संसार को सुंदर स्वरूप देने की कल्पना की, उसी प्रकार आज की युवा पीढ़ी अपने ज्ञान से देश के भविष्य को नई दिशा दे सकती है। विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर आर.के. एज्यूकेशन ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल ने अपने संदेश में विद्यार्थियों से भगवान विश्वकर्मा के जीवन और उनके कौशल से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा अपने आप में अनूठे हैं। पौराणिक मान्यताओं में उन्होंने अपने अद्भुत कौशल से देवताओं और मानव के लिए ऐसी नायाब संरचनाओं का निर्माण किया, जिनकी कल्पना और भव्यता आज भी लोगों को आश्चर्यचकित करती है। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा देवताओं के शिल्पी के रूप में भारतीय परम्परा में विशिष्ट स्थान रखते हैं। उनके कौशल और निर्माण की कथाएं आज भी मानव को उत्कृष्टता की ओर बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि वे केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित न रहकर कौशल, नवाचार और राष्ट्र निर्माण को अपने जीवन का उद्देश्य बनाएं। पूजा-अर्चना कार्यक्रम में डॉ. उदयवीर सिंह, प्रो. देवेन्द्र सिंह सहित संस्थान के प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी और छात्राएं उपस्थित रहे। सभी ने भगवान विश्वकर्मा से शक्ति, सामर्थ्य और सद्बुद्धि प्रदान करने की प्रार्थना की ताकि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में निष्ठा और कुशलता के साथ दायित्वों का निर्वहन करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें।








