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मथुरा 14 सितम्बर। राजीव एकेडमी फॉर टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट के प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट विभाग तथा बीबीए विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘सफलता के रहस्य’ विषय पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर  वृंदावन स्थित चन्द्रोदय मंदिर की आध्यात्मिक वक्ता हर ग्रेस चित्रा माताजी ने बीबीए तृतीय सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं को चरित्र निर्माण, मानसिक शांति और सामाजिक समरसता के लिए आध्यात्मिकता और नैतिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। अतिथि व्याख्यान का शुभारम्भ मंगलाचरण एवं मधुर कीर्तन से हुआ। अतिथि वक्ता ने छात्र-छात्राओं को सफलता के विभिन्न आयामों से परिचित कराते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन किसी भी व्यक्ति के भविष्य की नींव होता है, और इस नींव को मजबूत बनाने के लिए केवल किताबी ज्ञान ही काफी नहीं है। भक्तिमय वातावरण में हुए अतिथि व्याख्यान में विद्यार्थियों ने आध्यात्मिकता और जीवन मूल्यों से जुड़े महत्वपूर्ण विचारों को समझा। चित्रा माताजी ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की महत्ता तथा उनके जीवन से जुड़े विनम्रता, ज्ञान और निःस्वार्थ सेवा जैसे शाश्वत मूल्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने इन मूल्यों को विद्यार्थियों के दैनिक जीवन एवं भावी व्यावसायिक जीवन से जोड़ते हुए सफलता का व्यापक अर्थ समझाया।

अपने सम्बोधन में हर ग्रेस चित्रा माताजी ने कहा कि वास्तविक सफलता केवल धन, पद अथवा भौतिक उपलब्धियों से नहीं मापी जाती, बल्कि आंतरिक शांति, अच्छे चरित्र और निःस्वार्थ भाव से दूसरों की सेवा करने की भावना ही सच्ची सफलता का आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, कृतज्ञता, विनम्रता तथा अपने मूल्यों से जुड़े रहने को सफलता की महत्वपूर्ण कुंजी बताया। उन्होंने कहा कि लक्ष्य कितना भी बड़ा हो, उसे प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास, धैर्य और सकारात्मक सोच आवश्यक है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि व्यक्ति को अपने सांसारिक दायित्वों में उत्कृष्टता प्राप्त करते हुए भी नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिकता से जुड़े रहना चाहिए। चित्रा माताजी ने छात्र-छात्राओं को समझाया कि जीवन में आने वाली असफलताएं रुकावट नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की सीढ़ियां होती हैं। इस अवसर पर भक्तगणों ने कीर्तन एवं ध्यान के माध्यम से तनाव कम करने, एकाग्रता बढ़ाने और मानसिक दृढ़ता विकसित करने के उपाय बताए। राजीव एकेडमी फॉर टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट के चेयरमैन डॉ. रामकिशोर अग्रवाल ने कहा कि विद्यार्थियों का उज्ज्वल भविष्य केवल शैक्षणिक ज्ञान से नहीं, बल्कि अच्छे संस्कार, चरित्र, विनम्रता और निरंतर सीखने की भावना से निर्मित होता है। डॉ. अग्रवाल ने विद्यार्थियों से कठिन परिश्रम के साथ अपने जीवन मूल्यों को बनाए रखने का आह्वान किया। संस्थान के निदेशक डॉ. अमर कुमार सक्सेना ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सकारात्मक सोच का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को जीवन में सफलता के साथ-साथ एक बेहतर और जिम्मेदार व्यक्ति बनने की प्रेरणा देते हैं।

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