
हाथरस 26 अगस्त। माननीय उच्चतम न्यायालय एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हाथरस द्वारा जनपद में ‘मीडिएशन फॉर द नेशन 3.0’ (राष्ट्र के लिए मध्यस्थता 3.0) विशेष अभियान प्रभावी रूप से चलाया जा रहा है। राष्ट्रव्यापी यह अभियान दिसंबर 2026 तक निरंतर संचालित किया जाएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मुकदमों का मध्यस्थता के माध्यम से त्वरित, सरल, सहज एवं सौहार्दपूर्ण समाधान सुनिश्चित करना है, ताकि पक्षकारों को लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिल सके और उनका समय, धन एवं मानसिक तनाव बचाया जा सके। जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हाथरस श्री विनय कुमार-तृतीय तथा सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुश्री अनु चौधरी के कुशल मार्गदर्शन में हाथरस न्यायालय परिसर स्थित मध्यस्थता केंद्र में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत लंबित मामलों को मध्यस्थता के माध्यम से आपसी सहमति और संवाद के जरिए निस्तारित कराने के लिए पक्षकारों को प्रेरित किया जा रहा है।
इसी क्रम में मध्यस्थता अभियान-3.0 के अंतर्गत मध्यस्थता केंद्र, हाथरस में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अनु चौधरी की अध्यक्षता एवं मार्गदर्शन में निशा बनाम शाहरूख तथा सिमरन बनाम शिवम तौमर से संबंधित वैवाहिक मामलों में पक्षकारों के बीच सुलह-समझौता कराया गया। इस दौरान सचिव अनु चौधरी एवं मध्यस्थ अधिवक्ता हृदेश ने दोनों पक्षों की समस्याओं को गंभीरता एवं धैर्यपूर्वक सुना तथा उन्हें आपसी संवाद के माध्यम से विवाद का समाधान तलाशने के लिए प्रेरित किया। लगातार संवाद, विश्वास एवं सहयोग की भावना के आधार पर दोनों मामलों में पक्षकार समझौते की स्थिति तक पहुंचे और लंबे समय से चले आ रहे वैवाहिक विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान संभव हो सका। इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनु चौधरी ने कहा कि मध्यस्थता विवादों के निस्तारण का प्रभावी एवं सहज माध्यम है। इसके जरिए पक्षकार बिना लंबे न्यायिक संघर्ष के आपसी सहमति से अपने विवाद का समाधान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता की प्रक्रिया न केवल समय और धन की बचत करती है, बल्कि पक्षकारों के बीच आपसी संबंधों में सुधार लाने तथा समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का प्रयास है कि अधिक से अधिक लंबित वादों का निस्तारण मध्यस्थता के माध्यम से कराया जाए, जिससे आमजन को शीघ्र न्याय उपलब्ध हो सके। मध्यस्थता के माध्यम से विवाद का समाधान होने पर पक्षकारों के समय, धन और मानसिक तनाव की बचत होती है और आपसी भाईचारा भी कायम रहता है। सचिव ने कहा कि मध्यस्थता के माध्यम से हुए समझौते का उद्देश्य विवाद को स्थायी रूप से समाप्त करना है। इस प्रक्रिया में दोनों पक्षों की सहमति और हितों को ध्यान में रखते हुए समाधान तक पहुंचने का प्रयास किया जाता है। हाथरस में चलाया जा रहा मध्यस्थता अभियान 3.0 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से न्यायालयों में लंबित मामलों का शीघ्र और शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।










