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हाथरस 04 अगस्त। शहर की घनी आबादी वाली हनुमान गली में भारी मात्रा में सिक्के बरामद होने के मामले में जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार सिक्कों की आपूर्ति केवल स्थानीय व्यापारियों के माध्यम से ही नहीं, बल्कि सीधे बैंकिंग चैनल से होने की भी आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा कानपुर, झांसी और जयपुर के डीलरों से संपर्क होने की बात भी सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि इन शहरों से बड़ी खेप हाथरस पहुंचाई जाती थी और यहां से सिक्कों को दिल्ली के खारी बावली तक भेजे जाने की आशंका है। गौरतलब है कि 1 अगस्त की शाम एसडीएम राजबहादुर ने नयागंज स्थित एक स्टेशनरी की दुकान से 16 कट्टे और हनुमान गली स्थित एक घर से 90 कट्टे बरामद किए थे। बरामद सिक्कों का कुल वजन करीब 57 क्विंटल बताया गया है, जिनमें एक, दो और पांच रुपये के सिक्के शामिल हैं। कार्रवाई के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच रिपोर्ट दर्ज कराने को लेकर खींचतान की स्थिति बनी रही। देर रात नायब तहसीलदार शिवकुमार ने नवीन समाधिया के खिलाफ तहरीर दी, लेकिन तत्काल प्राथमिकी दर्ज नहीं हो सकी। घटना के बाद आरोपी और उसका सहयोगी फरार बताए जा रहे हैं।

कानपुर, झांसी और जयपुर से कनेक्शन की आशंका: सूत्रों के मुताबिक सिक्कों के इस कथित कारोबार के तार कानपुर, झांसी और जयपुर से जुड़े होने की आशंका है। आरोपी के करीबी व्यापारियों के हवाले से बताया जा रहा है कि इन शहरों से सिंडिकेट के रूप में सिक्कों की बड़ी खेप हाथरस पहुंचाई जाती थी। इसके बाद सिक्कों को दिल्ली के खारी बावली भेजे जाने की बात सामने आई है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। बैंकों से सीधे सिक्के पहुंचने की भी जांच: जांच में इस पहलू को भी शामिल किया गया है कि क्या नए सिक्कों की आपूर्ति कुछ बैंक कर्मियों या वित्तीय संस्थानों के माध्यम से कथित कारोबारियों तक पहुंच रही थी। यह भी आशंका जताई जा रही है कि आरबीआई से आने वाले नए सिक्कों को किसी माध्यम से अवैध कारोबार तक पहुंचाया जा रहा था। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को खंगालने में जुटी है। 48 घंटे बाद दर्ज हुई प्राथमिकी: बताया गया कि पुलिस के सीसीटीएनएस सॉफ्टवेयर में सिक्का निर्माण अधिनियम, 2011 की धाराएं उपलब्ध नहीं थीं, जिसके चलते प्राथमिकी दर्ज करने में देरी हुई। एनसीआरबी को ई-मेल और उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद संबंधित अधिनियम को शामिल किया गया। इसके बाद सोमवार शाम नायब तहसीलदार की तहरीर पर नवीन समाधिया के खिलाफ करीब 48 घंटे बाद प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस का कहना है कि मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और पूरे प्रकरण की छानबीन शुरू कर दी गई है।

 

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