हाथरस 16 जुलाई। श्री 108 शिवदत्त जी महाराज एवं मुनि श्री 108 पदमदत्त जी महाराज का 21 जुलाई को अलीगढ़ में भव्य मंगल प्रवेश होगा। मुनि महाराज 19 जुलाई को हाथरस से विहार कर अलीगढ़ के लिए प्रस्थान करेंगे। इस वर्ष उनका चातुर्मास अलीगढ़ में होना है, जिसके चलते वहां भव्य स्वागत और मंगल प्रवेश की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। आज मुनि महाराज की आहारचर्या हलवाई खाना स्थित छोटे जैन मंदिर के निकट श्री सचिन जैन (चूर्ण वाले) के यहां संपन्न हुई। इसके पश्चात हलवाई खाना स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़े मंदिर में आयोजित धर्मसभा में मुनि श्री शिवदत्त जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। प्रवचन के दौरान मुनि श्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों के अथक परिश्रम और त्याग के कारण ही आज समाज को इतने भव्य जिनालय प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मध्य प्रदेश के ग्वालियर का जैन मंदिर अपनी भव्यता के कारण ‘स्वर्ण मंदिर’ के नाम से प्रसिद्ध है, उसी प्रकार उत्तर प्रदेश में हाथरस का बड़ा जैन मंदिर भी अपनी विशेष पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि मंदिरों की नियमित देखरेख और रखरखाव आवश्यक है, ताकि उनकी गरिमा और भव्यता सदैव बनी रहे। मुनि श्री ने जैन धर्म की महिमा का वर्णन करते हुए आचार्य समंतभद्र स्वामी की तपस्या का उल्लेख किया और बताया कि उनकी कठोर साधना से भगवान चंद्रप्रभु का प्राकट्य हुआ, जिसके प्रभाव से तत्कालीन राजा सहित हजारों लोगों ने जैन धर्म को अपनाया। उन्होंने वाराणसी स्थित प्रसिद्ध फटे महादेव मंदिर का भी उल्लेख करते हुए उसे इस ऐतिहासिक घटना से जोड़ा। अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि मनुष्य का पहला धर्म पुरुषार्थ है। बिना प्रयास किए सफलता या सुख की अपेक्षा करना उचित नहीं है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से मंदिर आने, अभिषेक एवं पूजा करने का आग्रह करते हुए कहा कि यदि मांगना ही है तो प्रभु से मांगें, किसी अन्य के सामने हाथ फैलाने की आवश्यकता नहीं है। मुनि श्री ने ॐ के उच्चारण तथा 24 तीर्थंकरों के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। भक्ति गीत “मांगने की आदत जाती नहीं, तेरे आगे लाज मुझको आती नहीं” प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति दूसरों की कमियां खोजने के बजाय पहले स्वयं का आत्मावलोकन करे। उन्होंने समाज और मंदिर की संपत्ति के दुरुपयोग से बचने की सीख देते हुए कहा कि जो व्यक्ति समाज या मंदिर का धन अनुचित रूप से अपने पास रखता है, वह कभी सुखी नहीं रह सकता और उसका दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों तक भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने समाज के लोगों से षड्यंत्र और आपसी वैमनस्य से दूर रहकर धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया तथा कहा कि जैन कुल में जन्म लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति को नियमित रूप से मंदिर अवश्य जाना चाहिए। इस अवसर पर जैन नवयुवक सभा के अध्यक्ष उमाशंकर जैन, राकेश जैन, बाल पंडित विशाल जैन, अमित जैन, राजेश जैन (बैंक), संजीव जैन (भूरा), राजीव जैन लुहाड़िया, अभिषेक जैन, धीरज जैन (सभासद), जितेंद्र जैन (रेडीमेड), अतुल जैन (वसुंधरा), रतन जैन, संजीव जैन लुहाड़िया, राजकुमार जैन लोहिया, मनीष जैन, राजू जैन, विजय जैन, आशीष जैन, हरविंद जैन, अनिल जैन, पवन जैन, तन्नू जैन, जैकी जैन, नितिन जैन, संजीव जैन (डाकखाना), विनोद जैन, सौरभ जैन (अजमेरा), दीपक जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।









