
हाथरस 14 जुलाई। हाथरस पुलिस ने करीब 10 माह पुराने अपहरण एवं हत्या के एक ब्लाइंड केस का आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक विवेचना के जरिए सफल खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने यक्ष ऐप, मोबाइल डिजिटल डेटा, इंस्टाग्राम चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), लोकेशन हिस्ट्री और अन्य डिजिटल फुटप्रिंट के विश्लेषण के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई। पूछताछ में डिजिटल साक्ष्यों के सामने आने पर आरोपी ने युवती की हत्या करना स्वीकार कर लिया। पुलिस के अनुसार, गांव सिकंदरपुर निवासी सर्वेश कुमार ने 23 सितंबर 2025 को थाना हाथरस जंक्शन में अपनी 17 वर्षीय पुत्री अंजली के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। परिजनों ने आशंका जताई थी कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसे बहला-फुसलाकर ले गया है। मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई, लेकिन शुरुआत में न कोई प्रत्यक्षदर्शी मिला और न ही कोई ठोस सुराग, जिससे यह मामला पूरी तरह ब्लाइंड बना रहा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में थानाध्यक्ष हाथरस जंक्शन ललित कुमार ने वैज्ञानिक तरीके से जांच आगे बढ़ाई। यक्ष ऐप के माध्यम से अंजली के मोबाइल फोन के डिजिटल डेटा का विश्लेषण किया गया। इंस्टाग्राम संपर्क, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन हिस्ट्री, सोशल मीडिया गतिविधियों और डिजिटल फुटप्रिंट की गहन जांच के साथ पुराने गुमशुदगी और अज्ञात शवों के रिकॉर्ड का भी मिलान किया गया। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच गांव सिकंदरपुर निवासी ओमकार तक पहुंची। पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान वह पहले गुमराह करता रहा, लेकिन जब उसके सामने डिजिटल साक्ष्य, सीडीआर और लोकेशन संबंधी प्रमाण रखे गए तो उसने हत्या की बात स्वीकार कर ली।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि अंजली की इंस्टाग्राम के माध्यम से आंध्र प्रदेश के एक युवक से बातचीत होती थी और घटना वाले दिन वह उसी से मिलने घर से निकली थी। ओमकार उसे बाइक से हाथरस जंक्शन रेलवे स्टेशन छोड़ने जा रहा था। रास्ते में उसने अंजली को वापस घर लौटने के लिए कहा, लेकिन उसने मना कर दिया। इसी दौरान युवती के परिजनों के लगातार फोन आने लगे। आरोपी को आशंका हुई कि यदि अंजली घर नहीं पहुंची तो शक उसी पर जाएगा। घबराकर उसने अंजली की हत्या कर शव नहर में फेंक दिया। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने नहर में शव की तलाश की, लेकिन काफी समय बीत जाने के कारण शव नहीं मिला। जांच के दौरान पता चला कि 18 सितंबर 2025 को कोतवाली सदर क्षेत्र की एक नहर से अज्ञात युवती का शव बरामद हुआ था, जिसकी पहचान न होने पर अंतिम संस्कार कर दिया गया था। पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, शव के फोटो, टैटू, कपड़ों और अन्य पहचान चिन्हों का परिजनों से मिलान कराया, जिसके बाद उन्होंने शव की पहचान अंजली के रूप में की। इस प्रकार यक्ष ऐप से प्राप्त डिजिटल विश्लेषण, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल फुटप्रिंट, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और पुराने अभिलेखों के मिलान से पुलिस ने 10 माह पुराने इस ब्लाइंड मर्डर केस का सफल खुलासा कर आरोपी ओमकार को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई में एसओजी प्रभारी धीरज गौतम, थानाध्यक्ष हाथरस जंक्शन ललित कुमार एवं उनकी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।











