
हाथरस 14 जुलाई। जिला अस्पताल परिसर में 17.98 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन 50 बेड की अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) बजट के अभाव में तय समय पर पूरी नहीं हो सकी है। निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के एक वर्ष बाद भी अधूरा है, जिससे गंभीर मरीजों को जिले में बेहतर उपचार की सुविधा नहीं मिल पा रही है और उन्हें अलीगढ़ व आगरा रेफर करना पड़ रहा है। मई 2024 में शुरू हुई इस परियोजना को 31 मई 2025 तक पूरा किया जाना था, लेकिन बजट समय पर उपलब्ध न होने के कारण निर्माण कार्य बार-बार प्रभावित होता रहा। अक्टूबर 2025 में धनराशि की कमी के चलते निर्माण पूरी तरह ठप हो गया था। जनवरी 2026 तक कुल स्वीकृत बजट में से केवल 8.87 करोड़ रुपये ही जारी हो सके थे, जिससे करीब चार महीने तक काम प्रभावित रहा। फरवरी 2026 में शासन से 6.20 करोड़ रुपये की नई किस्त मिलने के बाद निर्माण कार्य दोबारा शुरू हुआ। वर्तमान में परियोजना के लिए कुल स्वीकृत बजट का लगभग 83 प्रतिशत यानी 15.07 करोड़ रुपये जारी हो चुके हैं। हालांकि, शेष लगभग 3 करोड़ रुपये (17 प्रतिशत) की धनराशि अभी लंबित है, जिसके कारण निर्माण कार्य फिर से धीमी गति से चल रहा है। निर्माण कार्य कर रही संस्था यूपी सिडको के अनुसार अब तक भवन का लगभग 81 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है। कार्यदायी संस्था का कहना है कि शेष बजट मिलते ही निर्माण कार्य तेजी से पूरा किया जाएगा। गौरतलब है कि 7 फरवरी 2026 को यूपी सिडको के चेयरमैन वाईपी सिंह ने निर्माणाधीन क्रिटिकल केयर यूनिट का निरीक्षण किया था। उन्होंने कार्य की धीमी प्रगति और कमियों पर नाराजगी जताते हुए निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद वित्तीय बाधाओं के चलते परियोजना निर्धारित गति नहीं पकड़ सकी। इस 50 बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट का उद्देश्य जिले के गंभीर मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही अत्याधुनिक उपचार उपलब्ध कराना है। यूनिट के प्रत्येक बेड पर वेंटिलेटर सहित आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर करने की आवश्यकता कम होगी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भवन निर्माण का 81 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। कार्यदायी संस्था को शेष कार्य शीघ्र पूरा कर भवन विभाग को हस्तांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि शेष बजट समय पर मिल जाता है तो अक्टूबर तक भवन स्वास्थ्य विभाग को सौंपे जाने की संभावना है।











