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मथुरा 07 जुलाई । पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान मथुरा में विश्व जूनोसिस दिवस के अवसर पर ‘एक स्वास्थ्य’ (वन हेल्थ) अवधारणा पर विशेष अतिथि व्याख्यान आयोजित किया गया। इस अवसर पर के.डी. मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर, मथुरा के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. बिस्वबिनोद सनफुई ने छात्र-छात्राओं तथा संकाय सदस्यों को जानवरों से इंसानों में फैलने वाली जानलेवा बीमारियों (जूनोटिक रोग) रेबीज, टीबी, स्वाइन फ्लू आदि के कारणों तथा बचाव के उपायों की विस्तार से जानकारी दी। अतिथि व्याख्यान का शुभारम्भ पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय कुलपति डॉ. अभिजीत मित्रा ने किया तथा अतिथि वक्ताओं का स्वागत अध्यक्ष डॉ. विकास पाठक, संयोजक डॉ. उदित जैन (प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष, वीपीएच) आयोजन सचिव डॉ. पारुल (सहायक प्रोफेसर, वीपीएच) ने किया। अपने सम्बोधन में डॉ. बिस्वबिनोद सनफुई ने कहा कि एक जानवर से शुरू हुई बीमारी पूरी दुनिया को ठप कर सकती है। यह बात सुनने में भले ही हैरान करने वाली लगे लेकिन कोविड-19 महामारी ने दिखा दिया कि एक सूक्ष्म वायरस किस तरह पूरी दुनिया की रफ्तार रोक सकता है।

डॉ. बिस्वबिनोद सनफुई ने बताया कि मनुष्यों में पाई जाने वाली ज्ञात संक्रामक बीमारियों में से लगभग 60 प्रतिशत की उत्पत्ति जानवरों से ही होती है। उन्होंने रेबीज जैसी 100 फीसदी घातक बीमारियों से बचाव के लिए पालतू और आवारा पशुओं के नियमित टीकाकरण पर जोर दिया। डॉ. बिस्वबिनोद सनफुई ने “उभरते जूनोटिक रोगों के नियंत्रण हेतु वन हेल्थ दृष्टिकोण” विषय पर मानव, पशु एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य के समन्वित दृष्टिकोण की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों में सबसे अधिक खतरनाक रेबीज है। इसके अलावा इबोला, निपाह वायरस, बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएंजा), लासा फीवर और बोवाइन ट्यूबरकुलोसिस जैसी कई अन्य गम्भीर बीमारियां भी जूनोटिक रोगों की श्रेणी में आती हैं। यह शैक्षणिक सहभागिता के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका तथा विभागाध्यक्ष सामुदायिक चिकित्सा डॉ. गगनदीप कौर के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन से सम्भव हो सकी। डीन डॉ. अशोका ने कहा कि के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर अग्रणी शैक्षणिक एवं जनस्वास्थ्य संस्थानों के साथ अपने सहयोग को निरंतर सुदृढ़ कर रहा है तथा वन हेल्थ अवधारणा को बढ़ावा देने तथा अंतर्विषयक साझेदारियों के माध्यम से जनस्वास्थ्य सम्बन्धी पहलों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

डॉ. अशोका ने कहा कि हमारा उद्देश्य पशुओं में फैलने वाली बीमारियों के प्रकोप के जोखिम को कम करने के लिए रोकथाम, शीघ्र पता लगाने, निगरानी और समन्वित कार्रवाई के बारे में जनता में जागरूकता बढ़ाना है। डॉ. अशोका ने कहा कि जूनोसिस अक्सर मानव-पशु-पर्यावरण के बीच के सम्पर्क क्षेत्र में उत्पन्न होता है, जहां लोगों, पशुधन, वन्यजीवों और पारिस्थितिक तंत्रों के बीच बढ़ती नजदीकियां रोग संचरण के अवसर पैदा करती हैं। विभागाध्यक्ष सामुदायिक चिकित्सा डॉ. गगनदीप कौर ने कहा कि विश्व जूनोसिस दिवस चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह आयोजन उभरते स्वास्थ्य खतरों से निपटने के लिए सरकारों, स्वास्थ्य पेशेवरों, पशु चिकित्सकों, पर्यावरण विशेषज्ञों और समुदायों के बीच सहयोग की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

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