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अलीगढ़ 06 जुलाई। राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (आरएमपीएसयू) के तीसरे दीक्षांत समारोह का आयोजन शीला गौतम सेंटर फॉर लर्निंग सभागार में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विभिन्न संकायों के 50 मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान कर सम्मानित किया। इनमें 33 स्वर्ण पदक छात्राओं को मिले। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के 51 हजार से अधिक विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, नई दिल्ली के अध्यक्ष प्रो. शेखर सी. मांडे ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज सफलता का अर्थ केवल दूसरों से आगे निकलना नहीं, बल्कि जीवनभर सीखते रहने की क्षमता विकसित करना है। उन्होंने कहा कि जिज्ञासा, नवाचार और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति ही युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करती है। विद्यार्थियों से उन्होंने आह्वान किया कि वे अपनी डिग्री को मंजिल नहीं, बल्कि नए सफर की शुरुआत मानें। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से ज्ञान, संस्कार और सेवा की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह स्वयं एक शिक्षक थे, इसलिए उनके नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय में उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षकों का होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को निर्धारित मानकों के अनुरूप आगे बढ़ना चाहिए और शिक्षा की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। राज्यपाल ने बेटियों के महत्व पर विशेष जोर देते हुए कहा कि बेटियां परिवार का सबसे बड़ा सहारा होती हैं। उन्होंने दहेज प्रथा का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि समाज में दहेज जैसी कुरीति को समाप्त करने की शुरुआत शिक्षित वर्ग से होनी चाहिए। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि जहां दहेज की मांग हो, वहां विवाह से इंकार करने का साहस दिखाएं। उन्होंने कहा कि आधुनिकता केवल पहनावे से नहीं, बल्कि विचारों से आती है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, कैंपस में कैंटीन, बैंक, डाकघर, पार्किंग और वाई-फाई जैसी सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए। साथ ही भवनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने और परिसर में मियावाकी वन विकसित करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि छात्रावासों में रहने वाले शिक्षक स्वयं भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच करें, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर भोजन उपलब्ध हो सके। समारोह के दौरान दीक्षांत स्मारिका का विमोचन किया गया तथा शिक्षकों द्वारा लिखित पुस्तकों का लोकार्पण भी हुआ। इसके अलावा चंदन वाटिका एवं मियावाकी वन का उद्घाटन किया गया। गोद लिए गए गांवों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ विशेष मां-बेटी सम्मेलन आयोजित किया गया तथा गोद लिए गए विद्यालयों की 15 छात्राओं का टीकाकरण भी कराया गया। दीक्षांत समारोह शिक्षा, उपलब्धि, नवाचार और सामाजिक सरोकारों का संगम बनकर सामने आया, जिसमें विद्यार्थियों को उत्कृष्टता के साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भी संदेश दिया गया।

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