सिकंदराराऊ (हसायन) 26 अप्रैल । जयपुर-मथुरा-बरेली-कासगंज राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित गांव जैतपुर के दिव्य योग कला मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन रविवार को भक्ति की रसधार बही। कथा व्यास आचार्य श्री श्री 108 कलाधर जी महाराज ने ‘गज-ग्राह’ प्रसंग का मार्मिक वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। आचार्य ने गजेंद्र मोक्ष की कथा सुनाते हुए बताया कि गजराज अपने पूर्व जन्म में भगवान विष्णु के अनन्य भक्त राजा इंद्रद्युम्न थे, जिन्हें अगस्त्य ऋषि के श्रापवश हाथी बनना पड़ा। वहीं, ग्राह (मगरमच्छ) पूर्व जन्म में हूहू नामक गंधर्व था, जिसे देवल ऋषि ने श्राप दिया था। कथा के वृत्तांत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि जब त्रिकूट पर्वत के सरोवर में जलक्रीड़ा के दौरान ग्राह ने गजेंद्र का पैर पकड़ लिया, तो वर्षों तक चले भीषण संघर्ष में गजेंद्र थककर असहाय हो गया। जब गजेंद्र का सारा बल और अहंकार समाप्त हो गया, तब उसने अनन्य भाव से भगवान विष्णु को पुकारा और अपनी सूंड से एक कमल का पुष्प उन्हें समर्पित किया। भक्त की करुण पुकार सुनकर भगवान विष्णु तत्काल गरुड़ पर सवार होकर आए और सुदर्शन चक्र से ग्राह का वध कर गजेंद्र को मृत्यु के पाश से मुक्त कराया।
आचार्य ने आध्यात्मिक संदेश देते हुए कहा कि जब मनुष्य अपना अहंकार त्याग कर पूर्ण रूप से ईश्वर की शरण में जाता है, तो भगवान स्वयं आकर उसके संकटों को हर लेते हैं। इस धार्मिक आयोजन में मुख्य रूप से किरन शर्मा, विनय शर्मा, रामेश्वर दयाल शर्मा, नीरज शर्मा, विपिन शर्मा, आरपी शर्मा, राजकुमार शर्मा, सत्यपाल सिंह, रिटायर्ड नेत्र परीक्षण अधिकारी सतेन्द्र सिंह, महीपाल सिंह, ऋषि कुमार, रुद्र प्रताप सिंह, मनोज कुमार जादौन, अशोक कुमार शर्मा, धर्मेन्द्र शर्मा, काशीनाथ मिश्रा, नवीन वाजपेई, रामसनेही शर्मा, उमेश शर्मा, सुरेन्द्र सिंह, श्यामदास दीक्षित सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।






















