
नई दिल्ली 08 अप्रैल । अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 40 दिनों से जारी भीषण युद्ध पर फिलहाल 14 दिनों के लिए विराम लग गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई भीषण तबाही की चेतावनी के बाद पाकिस्तान और तुर्किये की मध्यस्थता से यह सीजफायर संभव हुआ। समझौते के तहत ईरान ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को सशर्त खोलने पर सहमत हुआ है, लेकिन वहां से गुजरने वाले जहाजों पर ‘पुनर्निर्माण शुल्क’ लगाने की शर्त रखी गई है। इस युद्धविराम से वैश्विक तेल संकट का खतरा टल गया है, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण बरकरार रहना अमेरिका के लिए भविष्य में नई चुनौती बन सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें पाकिस्तान में होने वाली आगामी शांति वार्ता पर टिकी हैं।
कैसे टला महाविनाश?
मंगलवार का दिन बेहद तनावपूर्ण रहा। राष्ट्रपति ट्रंप ने रात 8 बजे तक ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ न खोलने पर निर्णायक सैन्य कार्रवाई की धमकी दी थी। अमेरिकी बी-52 बमवर्षक हवा में थे, लेकिन इसी बीच पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये की सक्रिय मध्यस्थता ने काम किया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर ने दोनों देशों के बीच अहम संदेशों का आदान-प्रदान किया, जिसके बाद ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर युद्धविराम का ऐलान किया।
युद्धविराम की 3 मुख्य शर्तें
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हमलों पर रोक : अगले 14 दिनों तक अमेरिका ईरान पर कोई बमबारी नहीं करेगा और ईरान भी अपनी सैन्य कार्रवाइयां रोकेगा।
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होर्मुज का प्रबंधन : ईरान वैश्विक व्यापार के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने को तैयार हो गया है, लेकिन अगले दो हफ्ते तक यहाँ जहाजों की आवाजाही ईरानी सेना के समन्वय में रहेगी।
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पुनर्निर्माण शुल्क : ईरान और ओमान ने यहाँ से गुजरने वाले जहाजों पर ‘ट्रांजिट शुल्क’ लगाने की योजना बनाई है, जिसका उपयोग युद्ध में हुई तबाही के पुनर्निर्माण के लिए होगा।
किसका पलड़ा भारी, कौन रहा घाटे में?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह युद्धविराम दोनों देशों के लिए मिश्रित परिणाम लेकर आया है:
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ईरान की कूटनीतिक जीत : भारी बमबारी और शीर्ष नेतृत्व खोने के बावजूद ईरान ने होर्मुज पर अपना नियंत्रण और प्रबंधन स्वीकार करवा लिया है। साथ ही, उसका परमाणु भंडार सुरक्षित बचा है।
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अमेरिका को रणनीतिक झटका : ट्रंप इसे अपनी जीत बता रहे हैं क्योंकि तेल की कीमतें गिर गई हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज पर ईरान का आधिकारिक नियंत्रण होना अमेरिका के लिए युद्ध पूर्व की स्थिति से भी बदतर परिणाम है।
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पाकिस्तान का बढ़ता कद : इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान एक प्रभावी शांतिदूत के रूप में उभरा है। अब आगामी शांति वार्ताएं इस्लामाबाद में होनी तय हुई हैं।
आगे क्या?
यह सीजफायर केवल 14 दिनों के लिए है। इस दौरान पाकिस्तान में होने वाली वार्ताओं में ईरान के 10-सूत्रीय और अमेरिका के 15-सूत्रीय प्रस्तावों पर चर्चा होगी। यदि इन दो हफ्तों में स्थायी सहमति नहीं बनी, तो महायुद्ध की लपटें फिर से उठ सकती हैं।

























