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सादाबाद 03 जुलाई। यूपी में ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में तहसील के दस्तावेज लेखक, स्टाम्प विक्रेता और अधिवक्ता 25 दिनों से हड़ताल पर हैं। शुक्रवार को भी उप निबंधक कार्यालय में कामकाज पूरी तरह ठप रहा और लोग मांगों को लेकर अड़े रहे। प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय परिसर में धरना दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कामकाज ठप होने से आम लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ा। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नई ई-रजिस्ट्री व्यवस्था से निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। इससे हजारों दस्तावेज लेखकों, स्टाम्प वेंडरों और उनके परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा। उनका कहना है कि ऑनलाइन प्रक्रिया और ई-पेमेंट पारंपरिक प्रणाली को खत्म कर देगी, जिससे वर्षों से इस कार्य से जुड़े लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी। यह व्यवस्था आम जनता के लिए भी जटिल साबित हो सकती है। एसडीएम मनीष चौधरी ने आंदोलन के संबंध में दस्तावेज लेखक संघ से रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद आंदोलन की नई रणनीति पर विचार-विमर्श शुरू हो गया है। दस्तावेज लेखक संघ के अध्यक्ष राजकुमार दीक्षित ने बताया कि शनिवार को जनपद इकाई की बैठक होगी। इसमें सभी पदाधिकारियों और सदस्यों से चर्चा के बाद हड़ताल को स्थगित करने या जारी रखने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। शुक्रवार को हुए धरना-प्रदर्शन में भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी भी समर्थन देने पहुंचे। किसान नेताओं ने कहा कि ऐसी कोई भी व्यवस्था लागू नहीं होनी चाहिए, जिससे लोगों के रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव पड़े। धरने में बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र पाराशर, गुनेंद्र सिंह, दस्तावेज लेखक संघ के अध्यक्ष राजकुमार दीक्षित, पूर्व लेखा परीक्षक श्याम सुंदर गिरी, मानू जैसवाल, संजय जैसवाल, हजारीलाल सक्सेना, शंकर लाल गोला, मुकेश शर्मा सहित कई दस्तावेज लेखक, स्टाम्प विक्रेता और अधिवक्ता मौजूद रहे। भारतीय किसान यूनियन के चंद्रेश चौधरी, विश्वजीत आर्य, भानुप्रताप सिंह, ओमप्रकाश सिंह, पदम सिंह आर्य और शेर सिंह भी उपस्थित थे।

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