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हाथरस 18 जून । परम गुरु तुलसी साहिब आश्रम में आयोजित 183वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। देश के विभिन्न प्रांतों से आए कवियों ने अपनी ओजस्वी, भक्तिमय एवं भावपूर्ण रचनाओं के माध्यम से गुरु महिमा, अध्यात्म, राष्ट्र प्रेम, सामाजिक सरोकार और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया। देर रात्रि तक चले इस कवि सम्मेलन में श्रोता काव्य रस में सराबोर होकर भावविभोर होते रहे।

कार्यक्रम का आयोजन आश्रम के गद्दीधर परम पूज्य महंत गुरु लोचन दास जी महाराज की अध्यक्षता में हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि उपजिलाधिकारी सदर राज बहादुर सिंह, विशिष्ट अतिथि जीएसटी विभाग के सहायक आयुक्त आर.के. सिंह, समाजसेवी प्रद्युम्न गुप्ता तथा ब्रज कला केंद्र के अध्यक्ष एवं साहित्यकार चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर तथा मां शारदा एवं संत तुलसी साहिब के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर महंत गुरु लोचन दास जी महाराज ने सभी अतिथियों को पीत वस्त्र ओढ़ाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। अपने आशीर्वचन में उन्होंने कहा कि संत तुलसी साहिब का साहित्य मानवता, प्रेम और आध्यात्मिक चेतना का अमूल्य खजाना है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। स्वागत उद्बोधन में साहित्यकार चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने कहा कि संत तुलसी साहिब की वाणी केवल आध्यात्मिक संदेश नहीं, बल्कि मानव जीवन को दिशा देने वाला प्रकाश स्तंभ है। उन्होंने हाथरस की संत परंपरा, साहित्य और अध्यात्म की विरासत को जनपद का गौरव बताया।कवि सम्मेलन का सफल संचालन आशुकवि अनिल बौहरे ने किया। उन्होंने अपनी रचना के माध्यम से कहा—
“घट रामायण ने किया हाथरस जग प्रसिद्ध, परम गुरु तुलसी साहिब थे महाकवि सिद्ध।”

वरिष्ठ कवयित्री मनु दीक्षित ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत करते हुए वातावरण को भक्तिमय बना दिया। ग़ाफ़िल स्वामी इगलास, चेतन उपाध्याय लाढ़पुर, मीरा दीक्षित, गीतकार नितिन मिश्रा, कवि हिमांशु शंकर, जनाब रासिद राहत मुरादाबादी सहित अनेक प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। मुख्य अतिथि उपजिलाधिकारी राज बहादुर सिंह ने भी अपनी काव्य प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी रचना में सेवा, समर्पण और संस्कारों से युक्त भारत के निर्माण का संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया।

साहित्यकार चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने तुलसी साहिब आश्रम की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि यह स्थल मानवता, प्रेम और सत्य का प्रतीक है तथा संत तुलसी साहिब की वाणी आज भी जनमानस को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान कर रही है।

कवि सम्मेलन की व्यवस्थाओं में पंडित मुकेश शर्मा का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर पंडित ऋषि कौशिक, पंडित अविनाश पचौरी, डॉ. अनार सिंह, विजय गुप्ता, जीवन लाल शर्मा, नवीन वार्ष्णेय, दीप्ति वार्ष्णेय, विष्णु कुमार, प्रशांत कुमार, पूजा वर्मा, गोलू, कपिल नरूला, संतोष उपाध्याय, ललित कुमार सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। देश के विभिन्न राज्यों से आए हजारों श्रद्धालुओं एवं संत तुलसी साहिब के भक्तों ने कवि सम्मेलन का भरपूर आनंद लिया। कार्यक्रम के अंत में व्यवस्थापक पंडित मुकेश शर्मा ने सभी अतिथियों, कवियों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।

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