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मथुरा 13 जून । अंतरराष्ट्रीय रक्तदान दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को केडी विश्वविद्यालय के चिकित्सा शिक्षा संस्थान के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के एमबीबीएस छात्र-छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर मेडिकल छात्र-छात्राओं ने स्वयं रक्तदान कर समाज को एक अनुकरणीय और प्रेरणादायक संदेश भी दिया।

अंतरराष्ट्रीय रक्तदान दिवस के एक दिन पहले केडी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के पैथोलॉजी विभाग द्वारा एमओआईसी ब्लड सेंटर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। समन्वयक डॉ. सोनम बिलावारिया, डॉ. संगीता, डॉ. योगिता, डॉ. आकांशा, डॉ. शुभम की देखरेख में मेडिकल छात्र-छात्राओं सावनी पाटिल, सुहानी पाटिल, आदित्य श्रीवास्तव, सानवी भाटिया, पूनम सैनी, मुद्रिका पाठक, ओजेस्वी शर्मा, श्रेयश घुगे, आयुष कुमार, आयुष पटेल आदि ने नुक्कड़ नाटक कर लोगों को रक्तदान के लाभ बताए और रक्तदान करने को प्रेरित किया। छात्र-छात्राओं ने दुर्घटना में घायल व्यक्ति की रक्त की कमी से मौत हो जाने का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत कर लोगों में संवेदना जगाई। इन छात्र-छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक के बाद स्वयं रक्तदान किया। इस अवसर पर डॉ. श्याम बिहारी शर्मा, डॉ. एस.के. बंसल, डॉ. वी.पी. पांडेय, डॉ. मंजू पांडेय, उप-कुलसचिव हेमा जोशी आदि ने रक्तदान के महत्व पर प्रकाश डाला। के.डी. विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर मनोज अग्रवाल ने अपने संदेश में कहा कि रक्तदान दुनिया का सबसे बड़ा दान है। हमें स्वेच्छा से रक्तदान कर मानव जीवन की रक्षा में अपना योगदान देना चाहिए। रक्तदान से कभी कोई गम्भीर बीमारी नहीं होती इसलिए प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को न केवल रक्तदान करना चाहिए बल्कि दूसरे लोगों को भी प्रेरित करना चाहिए। डॉ. श्याम बिहारी शर्मा ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का जीवन अनमोल है, लिहाजा हमें दूसरों का जीवन बचाने के लिए समय-समय पर रक्तदान करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि हमें अपने समाज और राष्ट्र को स्वस्थ रखना है तो आबादी की दृष्टि से कम से कम एक फीसदी यूनिट रक्त ब्लड बैंकों में हमेशा उपलब्ध होना चाहिए। यदि ब्लड बैंकों में रक्त होगा तो किसी गम्भीर बीमारी या आपातकालीन स्वास्थ्य स्थिति में समय से रक्त की कमी को पूरा कर लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। डॉ. वी.पी. पांडेय ने अपने संदेश में कहा कि रक्त की कमी वालों के लिए रक्त की पूर्ति जीवनदान जैसी है। डॉ. पांडेय ने रक्तदान के प्रति लोगों की भ्रांतियों को दूर करते हुए कहा कि शरीर में प्रत्येक तीन महीने में नए ब्लड का निर्माण होता है लिहाजा हर तीन महीने बाद कोई भी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। रक्तदान से शरीर में कोई कमी नहीं आती। उन्होंने कहा कि रक्त की एक-एक बूंद की कीमत होती है। इसका अहसास हमें तब होता है जब आपात स्थिति में इसकी आवश्यकता होती है।डॉ. मंजू पांडेय ने रक्तदान को जीवनदान बताते हुए कहा कि हर व्यक्ति को एक-दूसरे के सहयोग के लिए तत्पर रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि रक्तदान करने वाले दूसरे को जिन्दगी देने का पुण्य काम करते हैं। डॉ. एस.के. बंसल ने कहा कि रक्त किसी कम्पनी में नहीं बनता, इसलिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को रक्तदान जैसे जीवन रक्षक कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। इस अवसर पर डॉ. संगीता सिंह, डॉ. सोनम, डॉ. योगिता, डॉ. शुभम आदि ने रक्तदान कर लोगों की जीवन रक्षा का अनुकरणीय उदाहरण पेश करने वाले रक्तदाता छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन किया। रक्तदान शिविर में सहयोग टेक्निकल सुपरवाइजर एच.एस. शेखावत तथा उनकी टीम ने किया।

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