
हाथरस 13 जून । जमुना बाग की बहुचर्चित जमीन को लेकर विवाद एक बार फिर गरमा गया है। पूर्व एमएलसी मुकुल उपाध्याय द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के बाद जमीन विक्रेता हनुमान प्रसाद पोद्दार शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने दावा किया कि मामले में पूर्व में हुई जांच और न्यायालय में विचाराधीन वादों की जानकारी छिपाकर उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। गौरतलब है कि पूर्व एमएलसी मुकुल उपाध्याय ने 4 जून को कोतवाली हाथरस गेट में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष आशीष शर्मा, पूर्व विधायक देवेंद्र अग्रवाल तथा जमीन विक्रेता हनुमान प्रसाद पोद्दार के खिलाफ धोखाधड़ी और सरकारी दस्तावेजों में कथित हेराफेरी के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद हनुमान प्रसाद पोद्दार अपने दस्तावेजों के साथ एसपी कार्यालय पहुंचे और शिकायती पत्र सौंपकर अपना पक्ष रखा।
हनुमान प्रसाद पोद्दार ने जारी वीडियो बयान में कहा कि अलीगढ़ रोड स्थित जमुना बाग की लगभग 60 बीघा भूमि को लेकर उच्च न्यायालय तथा सिविल जज हाथरस की अदालत में सिविल वाद विचाराधीन हैं। इसके बावजूद न्यायालयी आदेशों को छिपाकर उनके विरुद्ध झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। उनका आरोप है कि उनसे पूर्व में उक्त कीमती जमीन का जबरन बैनामा कराया गया था। उन्होंने कहा कि योगी सरकार के कार्यकाल में प्रशासन की सहायता से दिसंबर 2020 में उन्हें अपनी भूमि पर कब्जा प्राप्त हुआ था। पोद्दार का आरोप है कि अब बची हुई जमीन और रास्तों पर कब्जे की मंशा से उन पर दबाव बनाया जा रहा है।
वहीं, पूर्व एमएलसी मुकुल उपाध्याय ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हनुमान प्रसाद पोद्दार पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष आशीष शर्मा और पूर्व विधायक देवेंद्र अग्रवाल की भाषा बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही मुकदमा दर्ज कराया गया है। उनके अनुसार उन्होंने जितनी भूमि की रजिस्ट्री कराई थी, उतनी ही भूमि पर उनका कब्जा है और विरोधी पक्ष द्वारा लगाए जा रहे सभी आरोप पूरी तरह निराधार हैं। क्षेत्राधिकारी नगर हिमांशु माथुर ने बताया कि दर्ज मुकदमे में सभी तथ्यों को शामिल करते हुए निष्पक्ष जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।


























