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हाथरस 13 जून । जिले में मक्के की रिकॉर्ड पैदावार से उत्साहित किसानों को शुक्रवार रात आई तेज आंधी और बारिश ने बड़ा झटका दिया है। महीनों की मेहनत से तैयार फसल खेतों में गिर गई, जबकि मंडियों में सुखाने के लिए रखी गई हजारों क्विंटल मक्का भी पानी में भीग गई। इससे किसानों के साथ-साथ आढ़तियों को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

मंडी में पहले से ही नमी वाली मक्का के कारण किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा था। बेहतर दाम की उम्मीद में किसान और आढ़ती फसल को मंडी परिसर, सड़कों और फड़ों पर सुखा रहे थे, लेकिन अचानक हुई बारिश ने सारी तैयारियों पर पानी फेर दिया। कई स्थानों पर मक्का पूरी तरह जलमग्न हो गई। आढ़तियों ने तिरपाल से फसल को बचाने का प्रयास किया, लेकिन तेज बारिश और जलभराव के कारण नुकसान नहीं रोका जा सका। किसानों का कहना है कि अब दोबारा सुखाने पर मक्का काली पड़ सकती है, जिससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित होगी और बाजार में कीमत और कम मिल सकती है। वहीं खेतों में खड़ी फसल भी आंधी के कारण गिर गई है, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। लहरा गांव के किसान विजय सिंह ने बताया कि गीली मक्का के कारण पहले ही भाव कम मिल रहे थे। इसी वजह से फसल को मंडी में सुखाने के लिए डाला गया था, लेकिन रात की बारिश ने सब कुछ खराब कर दिया। वहीं मुरसान के किसान किशनवीर ने बताया कि 30 बीघा में बोई गई उनकी मक्का की फसल आंधी से खेत में गिर गई है, जिससे पैदावार घटने की संभावना है और खेत में पानी भरने से फसल में सड़न भी पैदा हो सकती है। आढ़तियों का कहना है कि किसान बड़ी मुश्किल से फसल को मंडी तक पहुंचाते हैं। बारिश के कारण न केवल किसानों बल्कि व्यापारियों को भी भारी नुकसान हुआ है। मंडी में रखी गई फसल के नीचे पानी भर जाने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो गई है। जिले में इस वर्ष मक्का का रकबा बढ़कर 17,105 हेक्टेयर पहुंच गया है और लगभग 6.33 लाख क्विंटल उत्पादन का अनुमान है। अब तक हाथरस और सिकंदराराऊ मंडियों में करीब 32 हजार क्विंटल मक्का की आवक हो चुकी है, जबकि लगभग 6 लाख क्विंटल फसल अभी भी खेतों में खड़ी या कटाई के दौर में है। 15 जून से शुरू होने वाली सरकारी खरीद में केवल सूखी मक्का ही खरीदी जाएगी। ऐसे में बारिश से प्रभावित किसानों के सामने न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,410 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ प्राप्त करना भी चुनौती बन गया है।

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