
सिकन्दराराऊ (हसायन) 17 अगस्त। विकासखंड क्षेत्र के कस्बा व देहात क्षेत्र में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के पांचवे दिवस में पंचमी तिथि को वैदिक सनातन धर्म के अनुयाईयो के द्वारा नाग पंचमी का त्योहार मनाया गया।नाग पंचमी के पर्व को लेकर बच्चो में काफी उत्साह दिखाई दिया।नाग पंचमी के दिन सत्रह अगस्त दिन सोमवार को बच्चो के द्वारा अपने अपने घर से पात्र में दुग्ध लेकर नाग देवता के स्थल पर अर्पित कर चढाते हुए दिखाई दिए।वैदिक सनातन धर्म के श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ही नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है।महिलाओ ने घर घर में परंपरागत तरीके से दीवार पर काले रंग के कोयले से सर्प सांपो की आकृति उकेरकर व प्रतीकात्मक कागज पर छपे हुए प्रतीकात्मक सर्प नाग देवता के छायाचित्र को चस्पा कर विधि विधान के साथ नाग देवता की सेवई,चावल,खीर सहित विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाकर पूजा अर्चना की।बच्चों ने भी नाग देवता के निवास विश्राम स्थल पर दुग्ध अर्पित कर वहां से दुग्ध पात्र में मिट्टी खोदकर अपने घर पर पहुंचे।जहां पर महिलाओ ने नाग देव विश्राम निवास स्थल से आई मिट्टी को घर घर में सुखाकर मिट्टी मे गेह,जौ का बीजारोपण किया।नाग पंचमी से श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को दस दिन रह जाते है।नाग पंचमी मनाए जाने के कई पौराणिक मत है।श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने कालिया नाग का मान मर्दन किया था।नाग देवता की पूजा करने से हर समय नाग देव की परिवार घर कृपा बनी रहती है,साथ ही सर्प के दंशित होने का भी भय नही रहता है।महाभारत में राजा जन्मेजय के द्वारा किए गए सर्प यज्ञ को आस्तिक मुनि के द्वारा रोके जाने के कारण नाग प्रजाति को जीवनदान मिलने के कारण माना गया है।













