
हाथरस 30 सितम्बर। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) एफटीसी-प्रथम रोबिन कुमार की अदालत ने चेक बाउंस के करीब नौ साल पुराने मामले में अभियुक्त गोविंद अग्रवाल को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने अभियुक्त को एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उस पर नौ लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में अभियुक्त को छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। मामला थाना कोतवाली क्षेत्र के मोती बाजार से जुड़ा है। मोती बाजार निवासी आशा गुप्ता ने न्यायालय में वाद दायर करते हुए बताया था कि उनके बर्तन व्यवसायी गोविंद अग्रवाल निवासी मोती बाजार से पारिवारिक संबंध थे। वाद के अनुसार जनवरी 2017 में आर्थिक सहायता के तौर पर आशा गुप्ता और उनके पुत्र दीप वाष्र्णेय ने अलग-अलग किस्तों और ऑनलाइन माध्यमों से गोविंद अग्रवाल को कुल छह लाख रुपये दिए थे।
राशि वापस करने के लिए गोविंद अग्रवाल ने 21 जनवरी 2021 को पांच लाख रुपये का केनरा बैंक का चेक जारी किया था। आशा गुप्ता ने जब चेक को भुगतान के लिए बैंक में प्रस्तुत किया तो खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इसके बाद चेक की राशि के भुगतान के लिए कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया। भुगतान नहीं मिलने पर आशा गुप्ता ने न्यायालय की शरण ली। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों का अवलोकन किया और दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने गोविंद अग्रवाल को परक्राम्य लिखत अधिनियम (एनआई एक्ट) की धारा 138 के तहत दोषी पाया। न्यायालय ने दोषसिद्धि के बाद अभियुक्त को एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई और नौ लाख रुपये का अर्थदंड निर्धारित किया। अदालत के आदेश के अनुसार अर्थदंड की राशि में से 8.90 लाख रुपये आशा गुप्ता को क्षतिपूर्ति के रूप में प्रदान किए जाएंगे। वहीं अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में अभियुक्त को छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।










