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मथुरा 19 अगस्त। संस्कृति विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस के अवसर पर केंद्रीय पुस्तकालय एवं भारतीय ज्ञान परंपरा पुस्तकालय के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित कर पुस्तकालय विज्ञान के जनक एवं पद्मश्री प्रोफेसर एस आर रंगनाथन की 134वीं जयंती मनाई गई। कार्यक्रम में पुस्तकालयों की बदलती भूमिका, डिजिटल संसाधनों और विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं बौद्धिक विकास में पुस्तकालयों के योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष एवं पुस्तकालय विशेषज्ञ डॉ. बृजेश कुमार वर्मा द्वारा अतिथियों, शिक्षकों, अधिकारियों एवं पुस्तकालय कर्मचारियों के स्वागत के साथ हुआ। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पुस्तकालय केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आधुनिक एवं डिजिटल संसाधनों के माध्यम से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण ज्ञान एवं शोध सामग्री उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

इस वर्ष राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस की विषय-वस्तु “पुस्तकालय: लोगों को जोड़ना, ज्ञान को संरक्षित करना और भविष्य को सशक्त बनाना” रही। कार्यक्रम में पुस्तकालयों को आधुनिक, डिजिटल, विद्यार्थी-केंद्रित एवं शोधोन्मुख बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने इन्फ्लिबनेट केंद्र द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे अभियान ‘पुस्तकालय से प्रेम करें और ज्ञान पाएं’ की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि अभियान का उद्देश्य पुस्तकालयों की ज्ञान संरक्षण, शिक्षा, शोध, नवाचार तथा समाज को ज्ञान आधारित एवं समावेशी बनाने में भूमिका को रेखांकित करना है। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों एवं पुस्तकालय कर्मियों ने पुस्तकालयों के निरंतर विकास, ज्ञान के संरक्षण एवं प्रसार तथा शिक्षा और शोध को प्रभावी बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एम. बी. चेट्टी, पुस्तकालय सलाहकार समिति के अध्यक्ष डॉ. कंचन कुमार सिंह, शैक्षणिक अधिष्ठाता डॉ. रेनू गुप्ता, प्रबंधन एवं वाणिज्य संकाय के अधिष्ठाता डॉ. गंगाधर हुगर, डॉ. फहीम अख्तर तथा डॉ. नीलम लोधी सहित विभिन्न संकायों के शिक्षक एवं अधिकारी उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय की पुस्तकालय टीम की ओर से उप-पुस्तकालयाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, आयुर्वेद पुस्तकालयाध्यक्ष राकेश कुमार, नर्सिंग एवं सोमास पुस्तकालय के सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष शिवम पचौरी, फार्मेसी पुस्तकालय के सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष मेघन श्याम, पुस्तकालय सहायक उत्कर्ष दुबे एवं उत्कर्ष गुप्ता सहित अन्य कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य पुस्तकालयों को ज्ञान, शोध और नवाचार का सशक्त केंद्र बनाने के साथ विद्यार्थियों में पढ़ने एवं ज्ञान अर्जित करने की संस्कृति को बढ़ावा देना रहा।

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