
हाथरस 12 जुलाई। जनपद हाथरस साइबर अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है। देशभर में हुई करोड़ों रुपये की साइबर ठगी की रकम को खपाने के लिए साइबर अपराधी हाथरस के स्थानीय लोगों और फर्मों के बैंक खातों का कथित तौर पर ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतों के आधार पर साइबर सेल ने दो फर्मों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साइबर सेल प्रभारी आशीष कुमार ने बताया कि ‘ऑपरेशन वज्र’ के तहत डिस्ट्रिक्ट इंटेलिजेंस पैक और एनसीआरपी की जांच के दौरान इस बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा हुआ। देश के 10 राज्यों में करीब 12 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से संबंधित 17 शिकायतों में से 1.25 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हाथरस की दो फर्मों के खातों में ट्रांसफर की गई थी। पुलिस अब खाताधारकों की भूमिका और पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है।
हसायन की फर्म के खाते में आए 80.88 लाख रुपये
जांच के दौरान बैंक ऑफ महाराष्ट्र में संचालित जगदंबा इंटरप्राइजेज के चालू खाते को संदिग्ध म्यूल अकाउंट के रूप में चिन्हित किया गया। यह खाता हसायन क्षेत्र के छीतीपुर निवासी सत्यवीर सिंह के नाम पर है। एनसीआरपी के अनुसार, तमिलनाडु, तेलंगाना, बिहार सहित विभिन्न राज्यों में हुई 7.40 करोड़ रुपये की साइबर ठगी में से 80.88 लाख रुपये इसी खाते में ट्रांसफर किए गए।
श्रीगणेश ऑटोमोबाइल्स के खाते में पहुंची 44.57 लाख की रकम
दूसरे मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा के एक चालू खाते की जांच में पता चला कि यह श्रीगणेश ऑटोमोबाइल्स के नाम से संचालित है, जिसके संचालक हाथरस के बाला पट्टी निवासी रोहित सिंह हैं। एनसीआरपी के अनुसार, कर्नाटक, मेघालय, महाराष्ट्र, तमिलनाडु सहित विभिन्न राज्यों में हुई 4.79 करोड़ रुपये की साइबर ठगी में से 44.57 लाख रुपये इस खाते में ट्रांसफर किए गए।
पहले भी सामने आ चुका है म्यूल अकाउंट का मामला
इससे पहले मुरसान स्थित भारतीय स्टेट बैंक शाखा में चौधरी ट्रेडिंग कंपनी के चालू खाते में भी साइबर ठगी की रकम आने का मामला सामने आया था। 14 राज्यों में हुई 1.34 करोड़ रुपये की ठगी में से 1.82 लाख रुपये इस खाते में ट्रांसफर किए गए थे। एनसीआरपी पर एक ही खाते से जुड़ी 18 शिकायतों के बाद साइबर टीम ने 30 मई को मामला दर्ज किया था। यह खाता पटाखास कोरना निवासी रामगोपाल के नाम पर संचालित था और उसकी जांच अभी जारी है।
पूरे नेटवर्क की होगी जांच
पुलिस अधीक्षक चिरंजीव नाथ सिन्हा ने कहा कि विभिन्न राज्यों में हुए वित्तीय अपराधों की रकम का हाथरस के इन खातों में पहुंचना इस बात का संकेत है कि इन खातों का उपयोग म्यूल अकाउंट के रूप में किया गया। दोनों मामलों में बैंक दस्तावेज, खातों का विवरण और एनसीआरपी से जुड़े साक्ष्य कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि देशभर में सक्रिय इस साइबर फ्रॉड नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए व्यापक जांच की जा रही है तथा जिले के अन्य संदिग्ध खातों की भी पड़ताल की जा रही है।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट ऐसा बैंक खाता होता है, जिसका उपयोग साइबर अपराधी ठगी या अन्य अवैध गतिविधियों से अर्जित धन को एक खाते से दूसरे खाते में स्थानांतरित करने या उसकी वास्तविक पहचान छिपाने के लिए करते हैं। अक्सर साइबर ठग छात्रों, बेरोजगारों या आम लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खातों का उपयोग करते हैं। इसके बाद ठगी की रकम को कई खातों में घुमाकर निकाल लिया जाता है, जिससे असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।











