
हाथरस 18 अप्रैल । शहर के दून पब्लिक स्कूल में एक सार्थक और प्रेरणादायक पहल के रूप में पैरेंट ओरिएंटेशन प्रोग्राम 5.0 “चाय पे चर्चा” का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में नर्सरी से कक्षा 2 तक के विद्यार्थियों के 100 से अधिक अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य जे.के. अग्रवाल, सीनियर कोऑर्डिनेटर रीता शर्मा और फाउंडेशन कोऑर्डिनेटर नम्रता अग्रवाल ने अभिभावकों के साथ संयुक्त रूप से मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रारंभिक शिक्षा के महत्वपूर्ण वर्षों में अभिभावकों और विद्यालय के बीच एक मजबूत सहयोग एवं संवाद स्थापित करना था।
प्रधानाचार्य जे.के. अग्रवाल के कुशल नेतृत्व में आयोजित इस चर्चा में “सीखने के सिद्धांत: आनुवंशिकता और वातावरण” विषय पर विशेष बल दिया गया। चर्चा के दौरान यह समझाने का प्रयास किया गया कि आनुवंशिकता और वातावरण दो ऐसे वैज्ञानिक कारण हैं, जो बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं। कार्यक्रम का वातावरण अत्यंत सहज और संवादात्मक रहा, जहाँ अभिभावकों ने न केवल अपनी राय रखी, बल्कि विद्यालय की शिक्षण पद्धति और दृष्टिकोण को भी निकट से समझा। विद्यालय की ओर से स्पष्ट किया गया कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर अच्छी आदतों, आत्मविश्वास और सीखने के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना है।
अभिभावकों को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य जे.के. अग्रवाल ने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा के वर्ष बच्चों के जीवन की नींव होते हैं, जहाँ उनके व्यक्तित्व और जिज्ञासा का निर्माण होता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अंक केवल रिपोर्ट कार्ड बनाते हैं, लेकिन आदतें जीवन बनाती हैं। हमारा प्रयास बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ एक खुशहाल और जिम्मेदार नागरिक बनाने का है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें और उनकी तुलना दूसरों से करने के बजाय उनकी व्यक्तिगत रुचियों और कौशल पर ध्यान दें। कार्यक्रम के अंत में गतिविधि-आधारित और अनुभवात्मक शिक्षण पर विशेष बल दिया गया ताकि बच्चे बिना किसी मानसिक दबाव के सीखने का आनंद ले सकें। अभिभावकों ने विद्यालय की इस पहल की मुक्त कंठ से सराहना की और इसे बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम बताया। “चाय पे चर्चा” का यह प्रयास अभिभावकों और विद्यालय के बीच विश्वास और सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक सफल कदम सिद्ध हुआ।
























