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हाथरस 05 जून । जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और राजस्व अभिलेखों में हेरफेर के आरोप लगते हुए पूर्व एमएलसी एवं पूर्व राज्यमंत्री मुकुल उपाध्याय ने आठ लोगों को नामजद करते हुए तथा राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराया है। नामजद आरोपियों में समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक और तत्कालीन नगरपालिका चेयरमैन भी शामिल हैं। आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ कर करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि की स्थिति और स्वरूप बदलने का प्रयास किया गया, जिससे कुछ लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया जा सके। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

मुकदमे के अनुसार, मुकुल उपाध्याय की पत्नी रितु उपाध्याय ने 23 सितंबर 2009 को हनुमान प्रसाद पोद्दार पुत्र स्व. जुमना प्रसाद पोद्दार से 0.616 हेक्टेयर भूमि क्रय की थी। यह भूमि दक्षिण दिशा में शंकरलाल मलूक चंद्र एवं पीडब्ल्यूडी कार्यालय से सटी हुई तथा पश्चिम में आगरा-अलीगढ़ मार्ग पर स्थित बताई गई है। खरीद के समय विक्रेता द्वारा भूमि का कब्जा भी दे दिया गया था। शिकायत में कहा गया है कि रितु उपाध्याय ने भूमि पर बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया, जो वर्तमान में भी मौजूद है। वर्ष 2009 से 2013 तक उक्त भूमि पर खेती भी कराई गई। बाद में वर्ष 2013 में भूमि को उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम की धारा 143 के तहत अकृषक एवं आवासीय घोषित कराने के लिए सक्षम न्यायालय में आवेदन किया गया। राजस्व अधिकारियों द्वारा नियमानुसार कार्रवाई करते हुए नक्शा नजरी एवं रिपोर्ट के आधार पर भूमि को अकृषक एवं आवासीय घोषित करने के आदेश पारित किए गए। शिकायत में कहा गया है कि संबंधित दस्तावेजों पर तत्कालीन लेखपाल, राजस्व निरीक्षक, नायब तहसीलदार, तहसीलदार एवं उपजिलाधिकारी के हस्ताक्षर मौजूद थे। आरोप है कि 19 सितंबर 2020 को तत्कालीन नगरपालिका चेयरमैन आशीष शर्मा ने रागिनी शर्मा के नाम तथा पूर्व विधायक देवेंद्र अग्रवाल ने अपने पुत्र रजत अग्रवाल की फर्म में डीएलआरसी इम्फ्राइट प्रा. लि. के नाम, तथा परमेश्वरी दयाल गौड, देवेंद्र पचौरी व अन्य के नाम हनुमान प्रसाद पोद्दार की शेष 3.709 हेक्टेयर जमीन का इकरारनामा करा लिया। उसी दिन कथित रूप से विभिन्न पक्षों के नाम बैनामे भी संपादित कराए गए। मुकदमे में यह भी आरोप लगाया गया है कि बाद में हनुमान प्रसाद पोद्दार द्वारा सिविल न्यायालय (वरिष्ठ प्रभाग), हाथरस में दायर वाद में रितु उपाध्याय की भूमि को कथित रूप से जालसाजी के माध्यम से आगरा-अलीगढ़ मुख्य राजमार्ग से हटाकर मंडी समिति की ओर दर्शा दिया गया। मुकुल उपाध्याय का कहना है कि उन्हें इस कथित कूटरचना की जानकारी 20 अक्टूबर 2020 को हुई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से किया गया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद ही आरोपों की सत्यता और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

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