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लखनऊ 03 जुलाई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगामी 8 जुलाई को वाराणसी से मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ करेंगे। इस योजना के माध्यम से बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के पात्र शिक्षकों तथा उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की तर्ज पर देशभर के सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस योजना की घोषणा शिक्षक दिवस के अवसर पर की थी। अब योजना को लागू करने के लिए डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से लाभार्थियों का पंजीकरण और सत्यापन किया जा रहा है। साचीज (SACHIS) की मुख्य कार्यपालक अधिकारी अर्चना वर्मा ने बताया कि योजना के पारदर्शी संचालन के लिए ऑनलाइन डेटा संग्रह पोर्टल विकसित किया गया है। इस पोर्टल के माध्यम से शिक्षकों का पंजीकरण, सत्यापन और अनुमोदन पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया से होगा। उन्होंने बताया कि बेसिक शिक्षा विभाग के लिए विकसित पोर्टल पर अब तक 7,89,032 लाभार्थी अपना विवरण दर्ज करा चुके हैं। लाभार्थियों के आवेदन का सत्यापन संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) करेंगे, जबकि अंतिम अनुमोदन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) द्वारा दिया जाएगा। इसके बाद लाभार्थियों का डेटा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के बेनिफिशियरी आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (बीआईएस) पोर्टल से जोड़ा जाएगा। आधार आधारित ई-केवाईसी पूरी होने के बाद शिक्षक अपना डिजिटल कार्ड डाउनलोड कर योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। इसी प्रकार माध्यमिक शिक्षा विभाग के पात्र शिक्षकों के लिए भी 3 जुलाई से ऑनलाइन डेटा संग्रह पोर्टल शुरू कर दिया गया है। इस पोर्टल पर शिक्षकों द्वारा दर्ज किए गए विवरण का सत्यापन संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य करेंगे, जबकि अंतिम अनुमोदन जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) द्वारा किया जाएगा। अनुमोदन के बाद लाभार्थियों का डेटा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण को भेजा जाएगा और ई-केवाईसी पूर्ण होने पर शिक्षक डिजिटल कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे। योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत उपलब्ध सभी चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी। शिक्षक एवं उनके आश्रित देशभर के सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस इलाज करा सकेंगे, जिससे गंभीर बीमारियों के उपचार के दौरान आर्थिक बोझ में उल्लेखनीय कमी आएगी। प्रदेश सरकार ने योजना के विस्तार की दिशा में भी कदम बढ़ा दिए हैं। जल्द ही उच्च शिक्षा विभाग के पात्र शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए भी अलग डेटा संग्रह पोर्टल शुरू किया जाएगा, जिससे विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षक तथा कर्मचारी भी इस स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का लाभ उठा सकेंगे।

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