
नई दिल्ली 03 अगस्त। असेसमेंट ईयर 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब कई टैक्सपेयर्स अपने रिफंड का इंतजार कर रहे हैं। अगर आपने समय पर ITR फाइल कर दिया है और अभी तक रिफंड नहीं मिला है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। दरअसल, केवल ITR दाखिल कर देना ही रिफंड मिलने के लिए पर्याप्त नहीं होता। सबसे पहले रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन पूरा होना जरूरी है। ई-वेरिफिकेशन के बाद ही आयकर विभाग रिटर्न की प्रोसेसिंग शुरू करता है। यदि रिटर्न में किसी तरह की गलती नहीं है, सभी जानकारियां सही हैं और अतिरिक्त जांच की जरूरत नहीं पड़ती, तो रिफंड अपेक्षाकृत जल्द जारी हो सकता है। हालांकि, रिफंड मिलने की कोई एक निश्चित समय-सीमा सभी मामलों पर लागू नहीं होती और यह रिटर्न की प्रोसेसिंग तथा विभागीय सत्यापन पर निर्भर करती है। जिन टैक्सपेयर्स की ITR में बिजनेस इनकम, कैपिटल गेन, कई तरह के डिडक्शन या अन्य जटिल वित्तीय विवरण शामिल हैं, उनके रिटर्न की प्रोसेसिंग में अधिक समय लग सकता है। इसके अलावा अगर ITR में दी गई जानकारी और आयकर विभाग के पास उपलब्ध जानकारी में अंतर मिलता है या किसी दस्तावेज अथवा स्पष्टीकरण की जरूरत पड़ती है, तो विभाग की ओर से नोटिस या सूचना भेजी जा सकती है। ऐसे में टैक्सपेयर्स को निर्धारित समय के भीतर जवाब देना जरूरी होता है, तभी रिफंड की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
रिफंड सामान्य तौर पर तब बनता है जब टैक्सपेयर्स की ओर से जमा किया गया टैक्स उसकी वास्तविक टैक्स देनदारी से अधिक हो। इसके लिए ITR का सही तरीके से दाखिल और ई-वेरिफाई होना जरूरी है। साथ ही जिस बैंक खाते में रिफंड प्राप्त करना है, उसे आयकर विभाग के पोर्टल पर प्री-वैलिडेट रखना महत्वपूर्ण है। बैंक खाते की गलत जानकारी, बैंक अकाउंट का प्री-वैलिडेट न होना, PAN और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी में असंगति, TDS और ITR में अंतर, Form 26AS या AIS में दर्ज जानकारी से मेल न खाना अथवा रिटर्न में अधूरी या गलत जानकारी देना रिफंड में देरी की प्रमुख वजह बन सकती है। टैक्सपेयर्स अगर रिफंड जल्द पाना चाहते हैं तो ITR दाखिल करने के बाद समय पर ई-वेरिफिकेशन जरूर पूरा करें। बैंक अकाउंट नंबर और IFSC की जानकारी सही भरें और खाते को पहले से प्री-वैलिडेट रखें। ITR दाखिल करने से पहले Form 26AS, AIS और TDS की जानकारी का मिलान कर लेना भी जरूरी है। रिटर्न में किसी तरह की गलत या अधूरी जानकारी देने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे रिटर्न की प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है।
अगर तय समय के बाद भी रिफंड नहीं मिला है तो टैक्सपेयर्स आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर अपने अकाउंट में लॉगिन करके रिफंड स्टेटस चेक कर सकते हैं। इसके अलावा e-File > Income Tax Returns > View Filed Returns में जाकर संबंधित असेसमेंट ईयर का ITR चुनकर उसकी स्थिति देखी जा सकती है। यदि रिफंड जारी हो चुका है लेकिन बैंक खाते में राशि नहीं पहुंची है, तो बैंक खाते की जानकारी और रिफंड की स्थिति की दोबारा जांच करनी चाहिए। वहीं, कुछ परिस्थितियों में आयकर कानून के तहत रिफंड पर ब्याज का भी प्रावधान है। आयकर अधिनियम की धारा 244A के तहत पात्र मामलों में रिफंड की राशि पर ब्याज दिया जा सकता है। हालांकि, ब्याज की पात्रता और गणना संबंधित मामले की परिस्थितियों तथा लागू नियमों पर निर्भर करती है। इसलिए रिफंड में देरी होने पर टैक्सपेयर्स को पहले ITR का ई-वेरिफिकेशन, बैंक अकाउंट का प्री-वैलिडेशन और आयकर विभाग की ओर से किसी लंबित सूचना या कार्रवाई की जांच कर लेनी चाहिए।











