अलीगढ़ 02 अक्टूबर। बी दास कंपाउंड, नौरंगाबाद स्थित सिद्धपीठ माँ बगलामुखी धाम में चल रही सात दिवसीय संगीतमयी श्रीमद् भागवत कथा के दौरान आज कंस वध के पावन प्रसंग ने सभी श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा व्यास परम पूज्य पं. अशोक कुमार पांडेय जी महाराज ने विस्तार से बताया कि जब कंस को नारद जी से पता चला कि उसका काल वृंदावन में नंद के घर पल रहा है, तो उसने श्रीकृष्ण-बलराम को मथुरा बुलाने के लिए कपट भरी योजना बनाई। उसने धनुष यज्ञ और मल्ल युद्ध का आयोजन किया। अक्रूर जी को वृंदावन भेजकर दोनों भाइयों को मथुरा बुलवाया। मथुरा आते ही श्रीकृष्ण ने सबसे पहले धनुषशाला में रखे शिव धनुष को तोड़ दिया, फिर कंस के विशालकाय हाथी कुवलयापीड़ को एक ही प्रहार में मार गिराया। रंगशाला में कंस के सबसे शक्तिशाली पहलवान चाणूर और मुष्टिक ने श्रीकृष्ण-बलराम को ललकारा, लेकिन भगवान ने पलक झपकते ही दोनों का वध कर दिया।
अपने पहलवानों को मरता देख कंस सिंहासन से उठ खड़ा हुआ और चिल्लाने लगा, तभी भगवान श्रीकृष्ण बाज की तरह झपटे, कंस के केश पकड़े और उसे ऊंचे मंच से नीचे पटक दिया। क्षण भर में ही उस अत्याचारी का अंत हो गया, जिसके भय से पूरी मथुरा कांपती थी। कंस वध के बाद भगवान ने अपने नाना उग्रसेन को मथुरा का राजा बनाया और माता-पिता देवकी-वसुदेव को कारागार से मुक्त कराया। इस अवसर पर कथा की मुख्य आयोजक अंतरराष्ट्रीय संत महामंडलेश्वर डॉ. अन्नपूर्णा भारती पुरी जी महाराज (डॉ. पूजा सुकून पांडे जी) ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि कंस केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि हमारे अंदर के अहंकार, लोभ और अत्याचार का प्रतीक है। जब-जब पाप बढ़ता है, तब-तब धर्म की स्थापना के लिए भगवान को स्वयं आना पड़ता है। कथा के दौरान पूरा पंडाल “कंस निकंदन भगवान की जय” के उद्घोष से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति रस में झूम उठे।










