सादाबाद (सहपऊ) 22 अक्टूबर । सादाबाद-जलेसर मार्ग पर महरारा चौराहे से आगे स्थित श्रीराम हॉस्पिटल एवं नर्सिंग कॉलेज में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से विधिक साक्षरता अभियान के तहत जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर में पराविधिक स्वयंसेवक (पीएलवी) यज्ञदत्त शर्मा ने छात्राओं को महिलाओं के प्रजनन अधिकारों और गर्भपात से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के 29 सितंबर 2022 के फैसले के बारे में भी बताया गया। यज्ञदत्त शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि गर्भपात के अधिकार के मामले में केवल महिला की वैवाहिक स्थिति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) अधिनियम की व्याख्या करते हुए न्यायालय ने कहा था कि निर्धारित कानूनी शर्तों और विशेष परिस्थितियों में अविवाहित महिलाएं भी 24 सप्ताह तक गर्भपात कराने की अनुमति प्राप्त कर सकती हैं। शिविर में बताया गया कि महिला की वैवाहिक स्थिति उसके प्रजनन संबंधी अधिकारों का निर्धारण करने का एकमात्र आधार नहीं हो सकती। महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता, गरिमा और अपने शरीर से जुड़े निर्णय लेने के अधिकारों को ध्यान में रखना आवश्यक है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि गर्भपात से संबंधित मामलों में महिला की परिस्थितियों और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार निर्णय लिया जाना चाहिए।
छात्राओं को यह भी जानकारी दी गई कि गर्भपात के लिए पति या परिवार की सहमति सामान्य रूप से अनिवार्य शर्त नहीं है। हालांकि, नाबालिगों और कानून में निर्दिष्ट अन्य मामलों में अलग प्रावधान लागू हो सकते हैं। गर्भपात की अनुमति गर्भावस्था की अवधि, संबंधित परिस्थितियों और एमटीपी अधिनियम में निर्धारित शर्तों के अनुरूप दी जाती है। कार्यक्रम में महिलाओं के कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर उचित कानूनी जानकारी प्राप्त करने के महत्व पर जोर दिया गया। शिविर का उद्देश्य छात्राओं को उनके अधिकारों और उनसे संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी देकर जागरूक बनाना रहा।





