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सिकंदराराऊ (हसायन) 04 अक्टूबर । कस्बा के मोहल्ला किला खेडा स्थिति प्राचीन बगीची श्री हनुमान जी महाराज के मंदिर परिसर में श्रीराम युवा क्लब के तत्वावधान में आयोजित श्रीरामलीला महोत्सव के तहत रात्रि में वृंदावन के श्रीराधांचल लीला संस्थान के कलाकारों के द्वारा श्रीरामलीला महोत्सव के श्रीरामलीला कार्यक्रम का मंचन का आयोजन किया।श्रीरामलीला महोत्सव के कार्यक्रम के तहत श्रीरामलीला महोत्सव कार्यक्रम कमेटी के पदाधिकारियो व श्रीराधांचल लीला संस्थान के संचालक दल के कार्यकर्ताओ के द्वारा भगवान श्रीराम जानकी की आरती उतारकर स्तुति आराधना की।सातवे दिन श्रीराधांचल लीला संस्थान वृ्दावन के पात्रों के द्वारा भगवान श्रीराम के वनगमन लीला के दौरान सूर्पणखां लक्ष्मण संवाद,सूपर्ण खां के नाक कान काटना,खर दूषण वध,मारीचि की मृग माया,सीता हरण,जटायु उद्धार,सबरी के प्रेम लीला का मनोहारी तरीके से भाव पूर्ण मंचन किया।श्रीराधांचल लीला संस्थान वृंदावन के पात्रों ने भगवान श्रीराम के वनगमन के दौरान पंचवटी में पर्ण की झोपडी बनाकर रहने के दौरान लंकापति दशानन की बहिन सूपर्णखां भगवान श्रीराम,माता जानकी,लक्षमण को देखकर आती है।और भगवान श्रीराम से विवाह करने के लिए प्रस्ताव रखती है।भगवान श्रीराम ने सूपर्णखां से कहा कि उन्होने जनकपुर में सीता से विवाह करने के बाद मर्यादा में रहने व एक ही विवाह को मान्यता प्रदान करते हुए मर्यादा के पथ पर चलने की बात कह दी।भगवान श्रीराम ने अपने छोटे भाई लक्ष्मण के क्वारे अविवाहित होने की बात कहकर लक्ष्मण के पास भेज दिया।लक्ष्मण जी ने सूपर्णखां को काफी समझाने के बाद जब जिद पर अडी सूर्पणखां नही मानी।तो लक्ष्मण ने नाक कान काट दिए।सूर्पणखां के नाक कान कट जाने के बाद सूर्पणखां खर और दूषण के पास गई।भगवान श्रीराम ने भाई लक्ष्मण के साथ खर और दूषण का बध किया।खर और दूषण के बध हो जाने के बाद सूर्पणखां दशानन के पास लंका पहुंची।और वनवासी के साथ सुंदर महिला होने की बात कहकर छोटे वनवासी के  द्वारा कुरूप बना दिए जाने का बदला लेने के लिए पंचवटी भेज दिया।दशानंन ने मामा मारीचि के साथ मिलकर माया रूपी स्वर्ण हिरन बनाकर पंचवटी में भेज दिया।हिरन देख माता जानकी ने भगवान श्रीराम को हिरन का शिकार करने के लिए भेज दिया।भगवान श्रीराम के द्वारा माया रूपी स्वर्ण बने मारीचि का वध करने के दौरान आवाज सुनकर सीता जी ने लक्ष्मण को भी भगवान श्रीराम के पास भेज दिया।लक्ष्मण के वन के लिए भगवान के पास जाते ही मायावी दशानंन सीता हरण कर ले गया।सीता हरण के दौरान सीता की आवाज सुनकर जटायु राज ने दशानन से सीता को मुक्त कराए जाने के दौरान दशानन के द्वारा तलवार के तेज प्रहार से घायल कर दिया।भगवान श्रीराम ने जटायु का ससम्मान अंतिम संस्कार कर मोक्ष प्रदान किया।भगवान श्रीराम ने सबरी के प्रेम में आकर झूठे बेर खाकर अपनी नवद्या भक्ति का संदेश भी दिया।

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