हाथरस 19 सितम्बर। जिले के ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध श्री दाऊजी महाराज मेले को लेकर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष पं. विवेक उपाध्याय ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मेले की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता के बजाय मनमानी और राजनीतिक भेदभाव दिखाई दे रहा है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष का कहना है कि वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत हाथरस के प्रमुख राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों को मेले में आमंत्रित किया जाता रहा है, लेकिन इस वर्ष अन्य राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों को निमंत्रण दिए जाने के बावजूद कांग्रेस जिलाध्यक्ष को आमंत्रित नहीं किया गया। पं. विवेक उपाध्याय ने कहा कि यदि श्री दाऊजी महाराज का मेला सरकारी और सर्वसमाज का आयोजन है तो कांग्रेस के साथ भेदभाव क्यों किया गया। उन्होंने कहा कि दाऊजी महाराज किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और हाथरस की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा आयोजन है। उन्होंने मेले को राजनीतिक पक्षपात से दूर रखते हुए सभी राजनीतिक दलों और वर्गों को समान सम्मान देने की मांग की।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा के इशारे पर प्रशासन द्वारा कांग्रेस की अनदेखी की जा रही है। हालांकि ये आरोप कांग्रेस जिलाध्यक्ष की ओर से लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि निमंत्रण नहीं दिया जाना केवल औपचारिकता का विषय नहीं है, बल्कि इससे प्रशासन की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मर्यादा को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने मेले की आर्थिक गतिविधियों और विभिन्न व्यवस्थाओं को लेकर भी जांच की मांग की। पं. विवेक उपाध्याय ने कहा कि मेले में हुए विभिन्न ठेकों, आवंटनों, दुकानों, पार्किंग, मनोरंजन और अन्य आयोजनों की प्रक्रिया की पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने इन मामलों में स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से हुई हैं तो ठेकों और आवंटनों का सार्वजनिक विवरण उपलब्ध कराने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने प्रशासन से मांग की कि कांग्रेस जिलाध्यक्ष को निमंत्रण दिए जाने या नहीं दिए जाने के संबंध में स्थिति स्पष्ट की जाए। साथ ही मेले से जुड़े प्रमुख ठेकों, आवंटनों और आयोजनों की निष्पक्ष जांच एवं ऑडिट कराया जाए। उन्होंने कहा कि श्री दाऊजी महाराज का मेला हाथरस की पहचान और ब्रज की सांस्कृतिक विरासत है, इसलिए इसे किसी दल विशेष के प्रभाव से अलग रखते हुए सभी वर्गों और राजनीतिक दलों की समान सहभागिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।







