हाथरस 10 सितम्बर । आज 10 सितंबर विश्व में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने और लोगों को जीवन का महत्व समझाने के लिए मनाया जाता है। भागदौड़ भरी जिंदगी, अत्यधिक तनाव, आर्थिक तंगी, रिश्तों में कड़वाहट और असफलता का डर इंसान को इस हद तक तोड़ देता है कि वह जीवन समाप्त करने जैसा बुरा कदम भी उठा लेता है। विश्व भर के आंकड़े बताते है कि जितने लोग शारीरिक बीमार नहीं उससे कई गुना अधिक मानसिक बीमार है । आत्महत्या, एक पल का लिया गया गलत फैसला होता है, जो लंबे समय से चले आ रहे मानसिक तनाव का परिणाम होता है। ऐसे में यह समझना बहुत जरूरी है कि मानसिक अस्वस्थता भी शारीरिक बीमारी की तरह ही एक सामान्य समस्या है, जिसे डॉक्टरी परामर्श और कोनेटिव बिहेवियरल थेरेपी की मदद से पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
आत्महत्या के विचार रोकने के महत्वपूर्ण उपाय
अ)सकारात्मक संवाद: जब भी कोई स्वयं में तनाव महसूस करे, तो अपनी भावनाओं को दबाने के बजाय किसी भरोसेमंद व्यक्ति या दोस्त से खुलकर बात करें।
ब)खराब संकेतों को पहचानें:
यदि कोई व्यक्ति अचानक चुप रहने लगे, खुद को सबसे अलग कर ले या निराशाजनक बातें करे, तो उसे नजरअंदाज न करें बल्कि उसकी सहायता करें।
स) चिकित्सकीय सहायता: डिप्रेशन या अत्यधिक तनाव के लक्षणों पर तुरंत साइकोलॉजिस्ट या काउंसलर की सलाह लें।
द) स्थान परिवर्तन :
जिस स्थान पर भी आत्महत्या जैसा विचार आए उस स्थान को छोड़कर ऐसे स्थान पर चले जाए जहां कम से कम 5 लोग परिचित या अपरिचित आपके पास हों। या मंदिर में भी बैठ सकते है। जीवन में उतार-चढ़ाव आना स्वाभाविक है, लेकिन कोई भी समस्या इतनी बड़ी नहीं होती कि उसके लिए जिंदगी ही खत्म कर दी जाए। विचारों में खराबी ठीक वैसे ही आती है जैसे गाड़ी को सावधानी से चलाने पर भी उसका अलाइनमेंट खराब हो जाता है और गाड़ी ठीक चलते हुए भी टायरों को नुकसान पहुंचा देती है। समस्या को सुलझाने में समय की ही सहायता ले और खराब समय के निकलने की प्रतीक्षा करें।
डॉ यू एस गौड़ ,वरिष्ठ चिकित्सक
(जिला संघ चालक हाथरस )










