अलीगढ़ 05 सितम्बर। मंगलायतन विश्वविद्यालय में स्थापना दिवस व शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की विकास यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा पर चर्चा हुई। जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय गीत से हुआ। इसके बाद कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत, दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती वंदना के साथ हुई। विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय कुलगीत की प्रस्तुति दी। कुलसचिव कमांडर मनोज के. द्वारा अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रतिभा का प्रदर्शन किया। छात्र अर्जुन व प्रशांत ने एकल गीत प्रस्तुत किया, जबकि शुभम ने अभिनय की और सुजीत ने नृत्य प्रस्तुति देकर समारोह में रंग भर दिया। इसके बाद डायरेक्टर आईक्यूएसी प्रो. अब्दुल वदूद सिद्दीकी ने मंगलायतन विश्वविद्यालय की विकास यात्रा और उपलब्धियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने विश्वविद्यालय के अब तक के सफर और विकास के विभिन्न पहलुओं को सामने रखा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की सदस्य कुसुम गोयल ने कहा शिक्षा केवल जानकारी प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारे विचारों को दिशा देने, चरित्र निर्माण और आत्मविश्वास विकसित करने का आधार है। इस पूरी प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। मंगलायतन विश्वविद्यालय की यात्रा निरंतर प्रगति, उपलब्धियों और सामूहिक प्रयासों की यात्रा है। आज विश्वविद्यालय में 7,500 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से 50 हजार से अधिक शिक्षार्थी इससे जुड़े हैं। विश्वविद्यालय का 72 एकड़ का हरित एवं आधुनिक परिसर विद्यार्थियों के सपनों और अवसरों का केंद्र है। विद्यार्थियों का 400 से अधिक राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियों में चयन विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और समर्पित शिक्षक एवं कर्मचारियों की मेहनत का प्रमाण है। मुख्य अतिथि हाथरस सांसद अनूप प्रधान ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए शिक्षा और कुछ करने की लगन बेहद जरूरी है। एक व्यक्ति जब छोटा-मोटा काम करता है तो उसे सीमित आमदनी प्राप्त होती है, लेकिन वही व्यक्ति जब शिक्षा हासिल कर लेता है तो उसके सामने आगे बढ़ने और बेहतर अवसर प्राप्त करने की अनेक दिशाएं खुल जाती हैं। यदि हमें स्वयं के साथ-साथ अपने परिवार को भी आगे बढ़ाना है तो शिक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। संवाद के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान भी बातचीत और सकारात्मक संवाद के माध्यम से निकाला जा सकता है। उन्होंने विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस पर सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और विश्वविद्यालय परिवार को शुभकामनाएं दी।
अपने विचार रखते हुए विशिष्ट अतिथि डीबीआरएयू के पूर्व कुलपति प्रो. अशोक मित्तल ने कहा मंगलायतन विश्वविद्यालय की प्रगति और इसकी 20 वर्षों की यात्रा को देखकर गर्व की अनुभूति होती है। शिक्षक दिवस भारत की प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा को स्मरण करने का अवसर भी है। मां हमारी पहली शिक्षिका और पिता हमारे प्रारंभिक मार्गदर्शक होते हैं, जिसके बाद विद्यालय और विश्वविद्यालय के शिक्षक हमारे ज्ञान और व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. पीके दशोरा ने कहा कि विश्वविद्यालय की 20 वर्षों की यात्रा उपलब्धियों और निरंतर प्रगति की यात्रा रही है। इन वर्षों में विद्यार्थी संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो विश्वविद्यालय के प्रति समाज के विश्वास और हमारे सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। शिक्षक केवल पढ़ाने वाले न रहें, बल्कि विद्यार्थियों को शिक्षार्थी, जिज्ञासु और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। इसके लिए हमें स्वयं भी निरंतर सीखने और जागृत रहने की आवश्यकता है। हमारी प्रेरणा उस गुरुकुल परंपरा से है, जहां गुरु ज्ञान के माध्यम से आने वाली पीढ़ी का निर्माण करते थे। लॉन्ग सर्विस रिकॉग्निशन कार्यक्रम के तहत शिक्षकों व कर्मचारियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। वहीं उत्कृष्ट शिक्षकों का विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इससे समारोह में शिक्षक समुदाय के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव देखने को मिला। समारोह के अंत में मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। डीन एकेडमिक प्रो. अम्बरीष शर्मा ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सीमा गर्ग, परीक्षा नियंत्रक प्रो. दिनेश शर्मा, डीन रिसर्च प्रो. रविकांत, डीन मानविकी प्रो. राजीव शर्मा, उप निदेशक (प्रशासन) गोपाल राजपूत, चेयरमैन बेसवां कुंवर राज सिंह आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।









