हाथरस 02 सितंबर। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में उद्योगपति कौशल किशोर वर्मन के जन्मोत्सव के अवसर पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नगर के साहित्यकारों, कवियों, वैद्यों एवं गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की। विभिन्न रसों एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं ने श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं। काव्य गोष्ठी में वैद्य डॉ. उपेंद्र झा, वासुदेव उपाध्याय, कवि दीपक रफी, हास्य कवि पंडित हाथरसी, वैद्य मोहन बृजेश रावत, राजेश कुमार शर्मा आचार्य, डॉ. रोहिताश पाराशर, मनोज कुमार शर्मा आचार्य, डॉ. अनुपम भारद्वाज तथा कवि प्रभु दयाल दीक्षित ने अपनी रचनाओं का काव्य पाठ किया। डॉ. रोहिताश पाराशर ने वीर रस के साथ सामाजिक विषयों पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत कीं। दीपक रफी ने “राम का जो करेगा भजन” गीत तथा “उसकी मिट जाए दिल की तपन” कविता सुनाकर श्रोताओं की सराहना प्राप्त की। डॉ. अनुपम भारद्वाज ने भगवान शिव द्वारा कंठ में गरल धारण करने के प्रसंग को काव्यात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया, जबकि कवि प्रभु दयाल दीक्षित ने अपने दोहों से श्रोताओं को प्रभावित किया। वैद्य डॉ. उपेंद्र झा ने “निगाहों में बचपन समाया रहेगा” मुक्तक और “बड़े ही प्रेम से मिलिए अगर इंसान मिल जाए” रचना प्रस्तुत की। वहीं श्रृंगार रस की कविता “कैसे मैं तुझे कह दूं” को भी खूब सराहना मिली।
विद्यालय के प्रधानाचार्य लोकेंद्र नाथ शर्मा ने “मेरे भारत की माटी है चंदन और अबीर” गीत प्रस्तुत कर राष्ट्रप्रेम की भावना जगाई। राजेश कुमार शर्मा ने तवे से विवाद पर आधारित हास्य कविता सुनाकर गुदगुदाया, जबकि मनोज कुमार शर्मा ने ट्रेन की गति पर आधारित हास्य रचना से श्रोताओं को खूब हंसाया। वैद्य मोहन बृजेश रावत ने “मैं सीमा पर जाऊंगा” वीर रस की कविता के माध्यम से राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। विद्यालय के प्रबंधक मनोज अग्निहोत्री ने वर्तमान एवं पुराने समय के कवियों की रचनाशैली और उनकी सामाजिक भूमिका का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने बेटियों के संघर्ष और बदलती पारिवारिक जिम्मेदारियों को रेखांकित करती कविता “जिम्मेदारियों का बोझ परिवार पर पड़ा तो ऑटो रिक्शा तक चलाने लगी बेटियां” भी सुनाई। कार्यक्रम में विद्यालय अध्यक्ष पुरुषोत्तम राठी सहित विद्यालय परिवार के सदस्य एवं नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। भक्ति, वीर, हास्य, श्रृंगार एवं सामाजिक सरोकारों से ओतप्रोत प्रस्तुतियों ने काव्य गोष्ठी को जीवंत बना दिया।













