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हाथरस 01 सितम्बर। मौसम में बदलाव और खेतों में लंबे समय से जमा पानी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के साथ हसायन कस्बे और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। सर्दी-जुकाम, खांसी, तेज बुखार और बदन दर्द की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में लोग सरकारी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। इसी बीच क्षेत्र में संचालित बताए जा रहे निजी क्लीनिकों और पैथोलॉजी लैबों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कुछ स्थानों पर अप्रशिक्षित लोगों द्वारा मरीजों का उपचार किया जा रहा है और जांच व इलाज के नाम पर मनमानी रकम वसूली जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई निजी क्लीनिकों पर मरीजों को रक्त परीक्षण के लिए संबंधित पैथोलॉजी लैबों पर भेजा जाता है। सीबीसी, मलेरिया और विडाल सहित विभिन्न जांचों के नाम पर मरीजों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। आरोप यह भी है कि कुछ स्थानों पर जांच के बाद मरीज को जरूरत हो या न हो, उसे ड्रिप लगा दी जाती है। उपचार और जांच के नाम पर एक मरीज से करीब दो हजार से पांच हजार रुपये तक वसूले जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि वायरल बुखार के दौरान एक ही परिवार के कई सदस्य संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। सरकारी अस्पताल में उपचार और चिकित्सकीय परामर्श लेने के बाद भी राहत नहीं मिलने पर कई लोग निजी क्लीनिकों का सहारा लेते हैं। आरोप है कि इसी स्थिति का फायदा उठाकर कुछ जगहों पर बिना पर्याप्त योग्यता के मरीजों का इलाज किया जा रहा है।

हसायन कस्बे के मुख्य बाजार, गली-मोहल्लों से लेकर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों तक कई निजी क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब संचालित होने की शिकायतें हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुछ समय पहले स्वास्थ्य विभाग ने अभियान चलाकर कई क्लीनिकों और पैथोलॉजी लैबों के खिलाफ कार्रवाई की थी। कुछ केंद्रों को नोटिस जारी किए गए थे और कुछ को बंद भी कराया गया था। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के महज दो दिन बाद ही कई स्थानों पर दोबारा काम शुरू हो गया। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई तो की जाती है, लेकिन नोटिस के बाद आगे की प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से कथित अवैध क्लीनिक फिर से संचालित होने लगते हैं। इस संबंध में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. वरुण चौधरी ने बताया कि क्षेत्र में कई क्लीनिकों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। उन्होंने कहा कि वह मौके पर पहुंचकर स्थिति देखेंगे। उनका कहना था कि कई मामलों में प्रक्रिया विचाराधीन रहती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति चिकित्सक से संबंधित आवश्यक कागजात प्रस्तुत कर पंजीकरण करा लेता है तो स्थिति अलग हो जाती है। वायरल बुखार के बढ़ते मामलों के बीच निजी क्लीनिकों और पैथोलॉजी केंद्रों के संचालन को लेकर उठ रहे सवाल स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती हैं। जरूरत है कि विभाग क्षेत्र में संचालित सभी क्लीनिकों और जांच केंद्रों की योग्यता, पंजीकरण और व्यवस्थाओं की दोबारा जांच करे। साथ ही यदि कहीं बिना अनुमति या निर्धारित मानकों के विपरीत उपचार और जांच की जा रही है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि बीमारी के दौर में मरीजों के साथ किसी तरह का खिलवाड़ न हो।

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