
अपर जनपद न्यायाधीश एवं नोडल अधिकारी प्रशान्त कुमार ने न्यायिक अधिकारियों से कहा कि ऐसे पुराने वाद, जो लंबे समय से लंबित हैं और जिनका निस्तारण पक्षकारों की आपसी सहमति एवं सुलह-समझौते के आधार पर संभव है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया जाए। साथ ही संबंधित पक्षकारों को भी सुलह-समझौते के माध्यम से विवाद समाप्त करने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत विवादों के त्वरित एवं सरल समाधान का प्रभावी माध्यम है, इसलिए अधिक से अधिक पात्र वादों को चिन्हित कर उनके निस्तारण के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं, जिससे आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाया जा सके और आमजन को शीघ्र न्याय का लाभ मिल सके। बैठक में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हाथरस दीपक नाथ सरस्वती, सिविल जज (व.प्र.)/एफटीसी ईशा अग्रवाल, सिविल जज (क.प्र.) सारांश शर्मा, न्यायिक मजिस्ट्रेट खुशबू चन्द्रा, सिविल जज (क.प्र.)/एफटीसी-2 अरिजीत सिंह, सिविल जज (क.प्र.)/एफटीसी-1 रोबिन कुमार तथा अपर सिविल जज (क.प्र.) सादाबाद शिव कुमार यादव सहित अन्य न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए चिन्हित वादों की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्हें अधिक से अधिक संख्या में निस्तारित कराने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।













