
हाथरस/हसायन 13 अगस्त। हसायन कोतवाली परिसर में मिट्टी और ईंटों के मलबे के बीच कपड़े में लिपटी संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा जमीन पर पड़ी दिखाई देने का मामला सामने आया है। प्रतिमा की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है और प्रतिमा के सम्मान को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। मामले का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वायरल वीडियो सामने आने के बाद हाथरस पुलिस ने भी इसका संज्ञान लिया है। बताया जा रहा है कि हसायन कोतवाली परिसर में पुरानी बिल्डिंग की नीलामी के बाद उसके ध्वस्तीकरण का कार्य कराया जा रहा था। इसी दौरान जमा हुए मिट्टी और ईंटों के मलबे के बीच कपड़े में लिपटी डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा जमीन पर पड़ी दिखाई दी। स्थानीय लोगों का दावा है कि प्रतिमा कई दिनों से इसी स्थिति में पड़ी हुई है, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
प्रतिमा की स्थिति सामने आने के बाद लोगों ने इसे संविधान निर्माता के सम्मान से जुड़ा गंभीर विषय बताया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉ. आंबेडकर ने देश को संविधान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उसी संविधान के आधार पर देश की न्याय एवं कानून व्यवस्था संचालित होती है। ऐसे में पुलिस परिसर में उनकी प्रतिमा का मलबे के बीच इस तरह पड़ा दिखाई देना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि प्रत्येक वर्ष 14 अप्रैल को डॉ. आंबेडकर जयंती पर जनप्रतिनिधियों से लेकर शासन-प्रशासन तक उनके विचारों और आदर्शों को याद किया जाता है तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया जाता है, तो उनकी प्रतिमा के प्रति ऐसी स्थिति कैसे उत्पन्न हुई। हालांकि, प्रतिमा को वहां किस कारण रखा गया, उसे मलबे के बीच किसने रखा और यह स्थिति कितने समय से बनी हुई है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। प्रतिमा के साथ जातिगत कारणों से ऐसा किए जाने की आशंका को लेकर भी चर्चाएं हैं, लेकिन इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। इधर, वायरल वीडियो का हाथरस पुलिस ने एक्स के माध्यम से संज्ञान लिया है। हाथरस पुलिस ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से बताया कि “संदर्भित प्रकरण में क्षेत्राधिकारी सिकन्द्राराऊ को जांच कर शुचितापूर्ण विधिक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया।” स्थानीय लोगों ने पुलिस-प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, प्रतिमा को तत्काल सम्मानजनक स्थान पर रखवाने और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा मलबे के बीच किस परिस्थिति में पहुंची और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
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