
हाथरस 08 अगस्त। जिले के साहित्यकार त्रिलोक सिंह ठकुरेला की रचनाएं अब आंध्र प्रदेश के छात्र विभिन्न कक्षाओं में पढ़ेंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-2023 और 21वीं सदी के कौशलों के अनुरूप आंध्र प्रदेश सरकार की कक्षा सात की द्वितीय भाषा हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘कुसुम’ में त्रिलोक सिंह ठकुरेला की कविता ‘ऐसा वर दो’ को प्रथम पाठ के रूप में शामिल किया गया है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश के निजी प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित कई पाठ्यपुस्तकों में भी उनकी रचनाओं को स्थान दिया गया है। कक्षा दो की हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘प्रवाह हिंदी पाठमाला-2’ में उनकी बाल कहानी ‘राजा का आदेश’, कक्षा चार की ‘प्रवाह हिंदी पाठमाला-4’ में बाल कहानी ‘देवता की सीख’, कक्षा पांच की ‘प्रवाह हिंदी पाठमाला-5’ में कविता ‘मन को सुख से भरता देश’, कक्षा चार की ‘नन्हे कदम हिंदी पाठमाला-4’ में बाल कहानी ‘एकता की ताकत’ तथा कक्षा पांच की ‘नन्हे कदम हिंदी पाठमाला-5’ में कविता ‘पेड़’ को शामिल किया गया है। उल्लेखनीय है कि हाथरस जिले की सासनी तहसील के नगला मिश्रिया गांव में पिता खमानी सिंह और माता देवी के घर जन्मे त्रिलोक सिंह ठकुरेला वर्तमान समय के चर्चित बाल साहित्यकार और प्रख्यात कुंडलियाकार हैं। उनकी रचनाएं राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के साथ-साथ महाराष्ट्र, केरल, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों की हिंदी पाठ्यपुस्तकों में भी शामिल की गई हैं। शताधिक पाठ्यपुस्तकों में रचनाएं शामिल होने के साथ ही त्रिलोक सिंह ठकुरेला ने विभिन्न भारतीय भाषाओं के अनेक बाल कहानी संकलनों सहित दो दर्जन से अधिक पुस्तकों का संपादन किया है। राजस्थान साहित्य अकादमी सहित विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित त्रिलोक सिंह ठकुरेला ने बाल साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय सृजन किया है। ‘नया सवेरा’, ‘काव्यगंधा’, ‘समय की पगडंडियों पर’, ‘आनंद मंजरी’ और ‘सात रंग के घोड़े’ उनकी चर्चित काव्य कृतियां हैं। आंध्र प्रदेश की पाठ्यपुस्तकों में उनकी रचनाओं के शामिल होने से हाथरस जिले का साहित्यिक गौरव भी बढ़ा है।






