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हाथरस/अलीगढ़ 04 अगस्त।। लगातार बढ़ रही बिजली की मांग को पूरा करने के लिए अलीगढ़ मंडल में परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए मंडल के अलीगढ़, एटा, हाथरस और कासगंज जिलों में करीब 180 एकड़ जमीन की तलाश की जा रही है। अलीगढ़ मंडल के अपर आयुक्त (प्रथम) अखिलेश यादव ने चारों जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के निर्धारित मानकों के अनुरूप भूमि चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं। प्रस्तावित संयंत्र के लिए ऐसी जमीन की तलाश की जा रही है, जहां भूकंप की तीव्रता की संभावना रिक्टर पैमाने पर पांच से कम हो और नदी के रूप में पर्याप्त जल उपलब्ध हो। आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद की ओर से 24 जुलाई 2026 को जारी निर्देश के बाद स्थानीय प्रशासन ने भूमि तलाशने की प्रक्रिया शुरू की है। अपर आयुक्त अखिलेश यादव के अनुसार, मानकों के अनुरूप जमीन मिलने के बाद उसका पूरा विवरण शासन और एनपीसीआईएल को भेजा जाएगा।

उत्तर प्रदेश में वर्तमान में बुलंदशहर जिले के नरौरा में एकमात्र परमाणु ऊर्जा संयंत्र संचालित है। नरौरा परमाणु ऊर्जा केंद्र में 220-220 मेगावाट की दो इकाइयां हैं, जिनकी कुल क्षमता 440 मेगावाट है। यह संयंत्र गंगा नदी के किनारे स्थित है और इसका संचालन एनपीसीआईएल द्वारा किया जाता है। परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए पर्याप्त जल की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि बिजली उत्पादन की प्रक्रिया में पैदा होने वाली गर्मी को नियंत्रित करने और भाप को दोबारा ठंडा कर पानी में बदलने के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। एएमयू के भौतिकी विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. वसी हैदर के अनुसार, परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने में शुरुआती निवेश अधिक होता है, लेकिन दीर्घकाल में यह अपेक्षाकृत सस्ती ऊर्जा उपलब्ध करा सकता है। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा उत्पादन के दौरान कोयला या गैस आधारित संयंत्रों की तरह कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं होता। कम मात्रा में परमाणु ईंधन से बड़ी मात्रा में ऊर्जा का उत्पादन किया जा सकता है और एक संयंत्र कई दशकों तक संचालित हो सकता है। नरौरा परमाणु ऊर्जा केंद्र का निर्माण कार्य 1 नवंबर 1977 को शुरू हुआ था। इसकी पहली इकाई ने 1 जनवरी 1991 को और दूसरी इकाई ने 1 जुलाई 1992 को वाणिज्यिक उत्पादन शुरू किया था। प्रस्तावित नए संयंत्र के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की कार्यवाही शासन एवं संबंधित एजेंसियों के स्तर से की जाएगी।

 

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