सासनी 29 जुलाई। सासनी क्षेत्र के गांव भोजगढ़ी में आज मानसिक मन्द बुद्धि दिव्यांग सशक्तिकरण सेवा संस्था के मुख्य कार्यालय का भव्य शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं हवन-पूजन के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर क्षेत्र में सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्थान का एक नया अध्याय प्रारंभ हुआ, जिसे लेकर स्थानीय लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी रामगोपाल दीक्षित ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में ब्लॉक प्रमुख सासनी श्रीमती प्रतिभा कमल माहौर ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। समारोह में सोमेश सोलंकी, श्रीकृष्ण कुमार शर्मा (पूर्व प्रधान), प्रेम कुमार शर्मा (प्रधान प्रतिनिधि, भोजगढ़ी), टेकचंद (प्रधान प्रतिनिधि, तिलौठी), माधवी चौधरी (महिला किसान संघ) सहित क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि, समाजसेवी एवं ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
संस्था के अध्यक्ष योगेश कुमार यादव ने अपने संबोधन में कहा कि संस्था का प्रमुख उद्देश्य मानसिक रूप से दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना तथा उनके अधिकारों और सम्मान की रक्षा करना है। उन्होंने बताया कि संस्था भविष्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, पुनर्वास और कौशल विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं का संचालन करेगी, जिससे दिव्यांगजन सम्मानपूर्वक और आत्मनिर्भर जीवन जी सकें। कार्यक्रम के दौरान संस्था की ओर से समाजसेवा की एक प्रेरणादायी मिसाल प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि श्रीमती प्रतिभा कमल माहौर को सम्मान स्वरूप दुपट्टा ओढ़ाकर राधा-कृष्ण की छवि भेंट की गई। इसके साथ ही एक मूक-बधिर दिव्यांग को श्रवण यंत्र (कान की मशीन) भी प्रदान किया गया। संस्था के इस मानवीय प्रयास की उपस्थित अतिथियों एवं जनप्रतिनिधियों ने मुक्त कंठ से सराहना की और इसे समाज के लिए अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक पहल बताया।
अपने संबोधन में अतिथियों ने कहा कि इस प्रकार की संस्थाएं समाज के कमजोर एवं दिव्यांग वर्ग के लिए आशा की नई किरण बनती हैं। उन्होंने कहा कि समावेशी समाज का निर्माण तभी संभव है, जब प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान मिले। सभी अतिथियों ने संस्था के सामाजिक कार्यों की प्रशंसा करते हुए भविष्य में हर संभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया। कार्यक्रम का समापन आभार प्रदर्शन के साथ हुआ। इस अवसर पर संस्था के उज्ज्वल भविष्य, निरंतर प्रगति और समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान की कामना की गई। यह आयोजन केवल एक कार्यालय के उद्घाटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और सामाजिक समरसता की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायी पहल के रूप में यादगार बन गया।








